जामिया के पूर्व छात्र फैसल ने तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड,गिनीज़ बुक में दर्ज़ हुआ नाम

September 21, 2018 by No Comments

हमारी याददाश्त एक ऐसी चीज़ है जो हमें कई मौक़ों पर कामयाब करती है तो कई ऐसे मौके आते हैं जब हमें इसी वजह से नाकामयाबी भी होती है। कामयाबी तब होती है जब हमारी याददाश्त अच्छी होती है और नाकामयाबी तब जब इसमें हम कमज़ोर होते हैं।

याददाश्त का कमज़ोर या मज़बूत होना कई बातों पर निर्भर करता है। पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे इंसान के बारे में जिसने अपनी याददाश्त से ही अपना नाम रौशन किया है।

हम बात कर रहे हैं जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व छात्र मुहम्मद फैसल की। मुहम्मद फ़ैसल ने अपनी ज़बर्दस्त याददाश्त से सातवें गिनीज़ बुक रिकार्ड को तोड़ दिया है। उनका ये कमाल विशेष चर्चा का मुद्दा बना हुआ है।

उन्होंने यह कमाल 15 सितंबर, 2018 को असम वेली स्कूल, तेजपुर, असम में कर दिखाया। फ़ैसल के बारे में अगर हम बताएँ तो वे पहले से ही अपनी इस मज़बूत याददाश्त के लिए चार गिनीज़ बुक रिकार्ड बना चुके हैं।

डॉ विनीता बी सिंह, डा भुवन चन्द्रा बरुआ और डॉ धनपति डेका इस नए रिकार्ड के साक्षी हैं। फ़ैसल ने वर्ष 2016 में जेएमआई से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी।

याददाश्त का यह मुकाबला साल 1952 से 2017 तक ‘‘मोस्ट गोल्डन ग्लोब्स- बेस्ट मोशन पिक्चर-म्यूज़िक ऑर कॉमेडी विजेताओं के नाम बताने को लेकर था। कमाल की बात है कि फ़ैसल ने मुक़ाबले के सभी नियमों पर चलते हुए भी सही जवाब दिए। उन्होंने अपने जवाबों से सभी को अचंभित कर दिया है।

Books Learning School Library Reading

इस कम्पटीशन में फ़ैसल को एक वर्ष बताया जाता और वह फ़ौरन उस साल के मोस्ट गोल्डन ग्लोब्स- बेस्ट मोशन पिक्चर-म्यूज़िक ऑर कॉमेडी विजेताओं के नाम बिना रुके बता देता।इस लाजवाब प्रतियोगिता का पूरा वीडियो लियाया गया है।

इस रिकॉर्डिंग को गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड्स को पुष्टि के लिए भेज दिया गया है। सब सही पाए जाने पर फैसल को तीन महीने बाद सबसे मज़बूत याददाश्त वाले व्यक्ति का सर्टिफिकेट सौंप दिया जाएगा.

फ़ैसल के इस कारनामे से आप में भी अगर उत्साह की भावना जागृत हो रही है तो आप लोगों को चाहिए अपनी याददाश्त पर काम करें। पहले के राजा-महाराजा ऐसे होते थे जिनकी याददाश्त बहुत तेज़ होती थी। याददाश्त का तेज़ होना ही उन्हें कामयाब बनाता था। आज भी याददाश्त आपको किसी हद तक दूसरे से बेहतर बना देती है।

क्या आपको बचपन में इस बात के लिए नहीं टोका गया, कि सबक़ याद करो। हमें बार बार एक ही चीज़ को पढ़ने के लिए कहा जाता था, तब हम इस बात से बड़ा नाराज़ होते थे लेकिन अब ऐसा लगता है कि जो चीज़ तब याद की थी, आज भी कारगर है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *