वाह क्या लोकतंत्र है, विधानसभा के बाहर हमे सुनते नहीं और जीतकर अंदर गया तो बोलने नही देते..

February 26, 2018 by No Comments

निर्दलीय गुजरात विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बन चुके जिग्नेश मेवानी को किसी भी मुद्दे पर बोलने से रोकने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं।  जिग्नेश मेवानी ने विधायक बनने के बाद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को छुड़वाने के लिए युवा हुंकार रैली का आयोजन किया तो उन्हें इसकी परमिशन नहीं दी गई। हाल ही में गुजरात के भानुभाई वनकर के आत्मदाह के बाद गुजरात सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध में जिग्नेश को हिरासत में ले लिया गया। 

अब जिग्नेश मेवानी ने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर जानकारी दी है कि गुजरात विधानसभा में भी भी भानुभाई वनकर की मौत के मुद्दे पर बोलने नहीं दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है की विधानसभा स्पीकर ने उनका माइक बंद करवा दिया।  इस मामले में ट्वीट करते हुए जिग्नेश ने लिखा है कि वाह क्या लोकतंत्र है। जिन्होंने आत्मदाह किया वह भानु भाई वनकर मामले में विधानसभा में बोलने को ख़डा हुआ और सिर्फ 2 लाइन बोला कि स्पीकर महोदय ने हमारा माइक बंद करवा दिया और हाउस को एडजर्न कर दिया। विधानसभा के बाहर हमे सुनते नही और जीतकर अंदर गया तो बोलने नही देते।

जिग्नेश ने देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़े किये हैं की इस देश में हर किसी को बोलने की आज़ादी है, अपने विचार रखने की आज़ादी है। लेकिन एक विधायक होने के नाते मुझे विधानसभा में नहीं बोलने दिया जा रहा, तो इस देश के आम नागरिक की बात कैसे का कर सकते हैं ?

आपको बता की दो दिन पहले ही जिग्नेश मेवानी ने गुजरात पुलिस पर उनका एनकाउंटर करने की आशंका जताई है। जिग्नेश ने ये आशंका ‘ADR Police & Media’ नाम के व्हॉट्सएप ग्रुप की चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जाहिर की है। इस व्हाट्सप्प ग्रुप में मीडिया और पुलिस के वरिष्ठ लोग शामिल हैं।

इसमें अहमदाबाद रूरल के डिप्टी SP ने एक टेक्स्ट मैसेज करते हुए लिखा है, “जो पुलिस का बाप बनना चाहते हैं और पुलिस को लखोटा कहते हैं और जो पुलिस वालों का वीडियो बनाते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि उन जैसे लोगों से पुलिस ऐसा ही बर्ताव करती है। हिसाब बराबर. गुजरात पुलिस.” जिग्नेश ने इस मामले में डीजीपी, गृह मंत्रालय और गृह सचिव से शिकायत की है और उनकी सुरक्षा पर बात की है।

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