जो बीबी अपने शौहर को पास आने से रोकती है वो हुजुर पाक(स.अ.व.) का ये फरमान सुन ले…

March 2, 2019 by No Comments

दोस्तों आज हम आप को एक अहम मसला यहाँ पर बताने जा रहे हैं,कभी कभी ऐसा होता है कि किसी किसी बीवी अपने शौहर को हमबिस्तरी नहीं करने देती हैं,उसकी कई वजह होती है.आज हम आप को यही बात यहाँ पर बताने जा रहे हैं कि अगर किसी के साथ ऐसा मामला पेश आए तो वह क्या करे।
सबसे पहले आप को इस बात का इलम होना ज़रूरी है कि आपके लिए ये जायज़ नहीं कि अपनी बीवी को गंदे और नजिस काम करने पर मजबूर कर सकें या फिर कोई ऐसा काम करने पर मजबूर करें जिसकी बिना पर गंदगी पेट और मुँह में जाये ये सही नहीं।बल्कि आप पर लाज़िम और ज़रूरी है कि आप तिब्बी तरीक़े पर इस से मुबाशरत करें.

आप की बीवी को भी ये इलम रखना चाहिए कि इस के लिए ये जायज़ नहीं है कि वो अपने शौहर के बिस्तर को छोड़े जब वो उसे सही काम की दावत देता है तो उसे उस की बात तस्लीम करनी ज़रूरी है क्योंकि ये शौहर का हक़ है कि वह बीवी से अल्लाह तआला का मुबाह करदा इस्तिमता और नफ़ा हासिल करे।
बीवी के लिए जायज़ नहीं कि वो बग़ैर किसी शरई उज़्र के अपने शौहर से अलैहदा रहे और उसे उस का हक़ ना दे.उस के बारह में बहुत सी हादीस वारिद हैं जिनमें उस औरत के लिए बहुत ही सख़्त किस्म की वईद बयान की गई है जो अपने शौहर से दूर रहती है जिनमें से हम यहाँ पर कुछ हदीस का ज़िक्र करते हैं।
अबूहरैरह रज़ी अल्लाहु ताला अनहु बयान करते हैं कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया (जब कोई शख़्स अपनी बीवी को अपने बिस्तर पर बुलाए और बीवी आने से इनकार कर दे और शौहर इस पर नाराज़गी की हालत में ही रात बसर कर दे तो इस औरत पर सुबह होने तक फ़रिश्ते लानत करते रहते हैं) सही बुख़ारी हदीस नंबर (2998 )।

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अबूहरैरह रज़ी अल्लाहु ताला अनहु बयान करते हैं कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है जो शख्स भी अपनी बीवी को अपने बिस्तर पर बुलाए और इस की बीवी आने से इनकार कर दे तो आसमान वाला इस पर नाराज़ रहता है यहाँ तक कि इस का शौहर इस से राज़ी हो जाये।सही मुस्लिम हदीस नंबर ( 1736 )।
एक हदीस है कि जब ख़ावंद अपनी बीवी को अपनी हाजत पूरी करने के लिए बुलाए तो उसे आना चाहिए,अगरचे वो तनूर पर ही क्यों ना हो) सुनन तिरमिज़ी हदीस नंबर (1080) और जब औरत अपने शौहर के साथ रात गुज़ारने और इस के बिस्तर में जाने से रुक जाये तो इस का हक़ नफ़क़ा और तक़सीम का हक़ भी ख़त्म हो जाता है क्योंकि नफ़क़ा तो इस्तिमता के बदले में है और ऐसी औरत को अपने शौहर का नाफ़रमान कहा जाएगा।
और जब बीवी नाफ़रमानी करने लगे तो इस का नफ़क़ा ख़त्म इसलिए कि नफ़क़ा तो इताअत और अपने आप को शौहर के सपुर्द करने के बदले में था।
कुरान में आया है कि और जिन औरतों की नाफ़रमानी और बद-दिमाग़ी का तुम्हें डर और ख़दशा हो तो उन्हें नसीहत करो और उन्हें अलग बिस्तरों पर छोड़ दो और उन्हें मार की सज़ा दो फिर अगर वो तुम्हारी बात तस्लीम कर लें तो उन पर कोई रास्ता तलाश ना करो,बेशक अल्लाह तआला बड़ी बुलंदी और बड़ाई वाला है। (सूरे अलनिसा 34 )

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