जो लोग मछली शौक से खाते हैं वो रसूल पाक(स.अ.व्.) का ये फरमान देख लें पहले

November 25, 2018 by No Comments

दोस्तो अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहू उम्मीद करते हैं कि आप सब अल्लाह के फजल से ठीक और खुश होंगे दोस्तों आप सब बहुत खुश रहे और आसपास के लोगों के लिए आसान या बटे ताकि आप अपने वालीदैन के लिए सदका ए जरिया साबित हो तो आइए आज के टॉपिक पर बात करते हैं दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि इस्लाम में जब किसी जानवर को हलाल समझा जाता है तो उसको जबाह किया जाता है और जिन जानवरों को जबह नहीं किया जाता वह हराम होते हैं तो सवाल ही पैदा होता है कि मछली को अगर से बाहर नहीं किया जाता है तो वह हलाल कैसे हो गई आइए दोस्तों आपको बताते हैं.
दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि मछली के खाने के बहुत से फायदे हैं दोस्तों मछली के कई हिस्से होते हैं जिनके अलग अलग फायदा हैं तिब्बे नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मछली का गोश्त इसीलिए हलाल फरमाया है क्योंकि इसके बहुत से फायदे हैं दोस्तों में सफेद मछली में चिकनाई बहुत कम होती है जबकि तेल वाली मछली में चिकनाई बहुत ज्यादा होती है जोकि कोलेस्ट्रोल को खुद ब खुद कम कर देती है इसलिए इस मछली का इस्तेमाल इंसानी सेहत के लिए बहुत मुफीद है.

दोस्तों एक हदीस हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजि अल्लाह अनु से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने हमको एक बार हमको 300 सवारों के साथ भेजा और हमारे कमांडर हजरत आबू उबैदा बिन जर्रह थे तो जब हम कुछ दूर पहुंचे तो हमें भूख कि शिद्दत महसूस हुई तो हमने इस भूख में दरख़्तों के पत्ते खाएं इत्तेफाक से समुंदर से एक अम्बर नाम की मछली बाहर आई और हमने इसे 51 दिन तक खाया.

और इस की चर्बी से शोरवा बनाया इमाम अहमद बिन हंबल ने और इब्ने माज़ा मैं अपनी एक रिवायत में लिखा है हजरत अब्दुल्ला बिन उमर रजि अल्लाह ताला अनु अरे बात करते हैं कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया हमारे लिए दो मुर्दा और दो खून हलाल किए गए हैं जिनमें एक मछली और दूसरा टिड्डी है जिगर और तहाल बस्ता खून दोस्तों मछली को अरबी में सुमक कहते हैं और इसका घोस्ट बहुत सी बीमारियों में फायदेमंद होता है जैसे कि डिप्रेशन कैंसर ब्लड प्रेशर और भी बहुत सारी बीमारियां।। आगे देखें वीडियो में।।

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