जो शौहर अपनी बीबी के हाथ में तनख्वाह देते है….प्यारे नबी (स.अ.व.) ने उनके लिए ये फ़रमाया

इस्लाम में शौहर और बीवी के रिश्ते को सबसे ज्यादा तवज्जो दी गई है।आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि हमारे नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने उन्हें शौहर के बारे में क्या कहा है। जो अपनी बीवी के हाथ मिलाकर पूरी तनख्वाह देते हैं।नबी ए करीम ने फ़रमाया है कि अगर बीवी ने एक है और शहर की तमाम बातें मानती है।अगर घर का खर्च अच्छे ढंग से चलाने वाली है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है कि शौहर अपनी पूरी तनखाह लाकर अपने बीवी के हाथ में दे दे।

लेकिन अगर बीवी बिना जरूरत के खर्च करती है तो शौहर को ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे घर में परेशानी आएगी। अगर किसी का शौहर उसे पूरी तनख्वाह लाकर देता है। तो यह उसकी मोहब्बत है।

उस मोहब्बत के बदले बीवी शौहर को उसी तरीके से जवाब देना चाहिए। रुपयों का गलत इस्तेमाल न करे।बल्कि ज़रूरत के लिए ही इस्तेमाल करे।शौहर की इताअत का हुक्म तो अल्लाह ताला और इस के रसूल ने दिया है।

इसी रब-ए-करीम ने इन ताल्लुक़ात के मुताल्लिक़ तालीम भी अता फ़र्मा दी है।फिर हम औरतों पर म’र्द को ये फ़ज़ीलत अल्लाह करीम ने ही दी है।अल्लाह ताला ही के कलाम पाक में नेक औरतें,इताअत करने वालियाँ,अपनी हिफ़ाज़त करने वालियाँ,फ़रमाया गया है।

हम इन बातों को किसी तौर भी कोई बहाना बना कर या नाम देकर नजरअंदाज़ नहीं कर सकते। औरतों को मर्द के नाम की छत के नीचे बहिफ़ाज़त रहना तो अच्छा लगता है.इस के हाथों की मेहनत से कमाया गया रिज़्क़-ए-हलाल भी अच्छा लगता है।

इस की कमाई से अपना हिस्सा लेना भी बहुत भाता है।तो फिर बदले में शौहर की इताअत भी करनी चाहिए।नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक मर्तबा सवाल किया गया,सब औरतों से बेहतर कौन सी औरत है?आपने जवाब में फ़रमाया,उस का मफ़हूम कुछ यूं है।

वो औरत सबसे अच्छी है कि जब शौहर उस की तरफ़ देखे तो वो शौहर को ख़ुश कर दे और जब वो इस को कोई हुक्म दे तो मान ले।इस की ना-फ़रमानी ना करे और ना उस के माल से ऐसा तसर्रुफ़ करे जिसे वो नापसंद करता हो।(अबू दाऊद,निसाई)

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