वो दो लोग जिन्होंने काबा में जिना किया और उसके बाद पत्थर के बन गये,जानिए कौन थे वो?

December 4, 2018 by No Comments

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहू दोस्तों हमारी यही कोशिश होती है कि हम आपके लिए एक ऐसी न्यूज़ लेकर आएं जिससे आप को कुछ सीखने को मिले और दोस्तों इस्लामी दास्तानें भी इसी सिलसिले की कड़ी है दोस्तों इसी सिलसिले में आज हम आपके सामने एक ऐसा किस्सा लेकर आए हैं जिसे जानकर आप हैरान होंगे दोस्तों यह किस्सा दो बदबख्त के बारे में जिनका नाम असाफ और नायला है यह वही तो कमबख्त शख्स हैं जिन्होंने खाना ए काबा के अंदर जेनाह किया था तो अल्लाह पाक ने इन पर ऐसा कहर नाजिल किया जो कि आने वाली कौमो के लिए इब्रत का सबब बन गया.

दोस्तों हया इज्जत इस्मत और हलाल काम इस्लाम की बुनियादी उसूलों में से एक है मगर जमाने चाहत में इस चीज का तमाम नहीं किया जाता था वह लोग अपनी आदतों में जानवर से भी बदतर थे चुनाचे रसूल अकरम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को उनके ऊपर पैगंबर बनाकर भेजा गया जो कि अल्लाह ताला का पैगाम पहुंचाने आए खवातीन और हजरत सर जमीने अरब में मक्का में छोटी-छोटी दो पहाड़ियां हैं.

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जिन्हें सफा और मरवा के नाम से जाना जाता है जो हराम ए काबा मक्का मुकर्रमा की बिल्कुल करीब की है दोस्तों इन पहाड़ियों को बहुत ही मुकद्दस माना जाता है लेकिन जमाने जहिलियात में असाफ़ और नायला ने वहां खाने काबा के अंदर जेन्हा लिया था लेकिन अल्लाह पाक का इन पर इस कदर कहना दिल हुआ कि यह दोनों मसक कर पत्थर बन गए.

ज़माने जाहिरात में लोगों ने इन मूर्तियों को मक्का से उठाकर सफा और मरवा पर रख दिया और इन दोनों बुत की पूजा होने लगी तो जब इस्लाम धीमे-धीमे अरब में फैलता गया तो मुसलमान इन दोनों बुत की वजह से सफा और मरवा पर जाना गुनाह समझने लगे उस वक्त अल्लाह पाक ने कुरान ए मजीद में आयत उतरी की सफा और मरवा में जाना और उनकी जियारत करने में कोई हर्ज नहीं है बल्कि हज और उमरा में सफा और मरवा की जियारत जरूरी है.

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दोस्तों क़ुरआने करीम की एक आयत में अल्लाह पाक ने फरमाया है कि बेशक सफा और मरवा अल्लाह पाक की निशानियां में से एक हैं जो इस घर का उमरा करे उससे जरूरी है कि वह इन दोनों पहाड़ियों की जियारत करें जो कोई बात नहीं की कि करें तो अल्लाह उसको जबरदस्ती ला देने वाला खबरदार है.

दोस्तों रूह ए जमीन पर खाने काबा से ज्यादा मुकद्दस और एक जगह कोई नहीं है और तारीफ इस्लामी में यह बात दर्ज है कि जब जब खाना ए काबा की तरफ कोई गुमराही का हाथ उठा है तो अल्लाह पाक ने उस हाथ को तोड़कर और आने वाली कौम के लिए इब्रात हासिल करने का सबब बना दिया।

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