का'बा पर का'ले रंग का गिलाफ़ क्यों है?…मौ'लाना ता'रिक ने फ़रमाया

March 20, 2019 by No Comments

सऊ’दी अरब के दो शहर मक्का शरीफ और मदी’ना शरीफ दुनिया भर के मुस’लमानों के लिए इंतिहाई मुक़द्दस,बाबरकत और अहम मुक़ाम है जहां हर साल पूरी दुनिया से हर नसल,हर फ़िरक़े और रंग के मुस्लि’म इकट्ठे हो कर फ़रीज़ा हज अदा करते हैं,का-बे का तवाफ़ करते हैं,और अपने गुना’ह मा’फ़ कराने के लिए अल्लाह तआला के हुज़ूर गिड़’गिड़ा कर दुआएं मांगते हैं।
ख़ाना काबा हज़रत इस्माईल अलैहि इस्लाम ने अपने वालिद हज़रत इबराहीम अलैहि इस्लाम के साथ मिलकर तामीर किया था।मक्का मुकर्रमा शुरू दिन से ही आज तक एक अहम मुक़ाम है अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यहां पर हिदायत का सिलसिला जारी रखा,और जब सेलाब से काअबा की दीवारों को नुक़्सान पहुंचा तो अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने काअबा की दुबारा तामीर की।

काबा शरीफ दुनिया का पहला घर है,जिसे सबसे पहले फरिश्तों ने बनाया था,उसके बाद जब इंसानी दुनिया शुरू हुई तो,हर दौर में अल्लाह के नबियों ने इसकी रखवाली की और जब बिलकुल से तबाह हो गया था तो काफी जमाने तक यहाँ कोई नहीं आया फिर अल्लाह के हुक्म से हज़रत इस्माईल अलैहि इस्लाम ने अपने वालिद हज़रत इबराहीम अलैहि के साथ मिलकर इसकू दूबारा तामीर किया था,उसके बाद से यह मस्जिद तामीर है और इस में नया नया काम होता रहता है।
काबा शरीफ शरीफ पर हमेशा एक कपड़ा चढ़ा रहता है,उसको गिलाफ कहा जाता है,यह काले कलर का होता है और हर साल इसे बदला जाता है, हर साल काले कलर का ही गिलाफ चढ़ाया जाता है,इसकी वजह यह बताई जाती है कि काले कलर पर नज़र रुकती है,और लोग देर तक देखते रहते हैं,जबकि दूसरे कलर के कपड़ों पर देर तक नज़र नहीं रुकती है।

काबा शरीफ को दुनिया भर के मुसलमान बहुत एहतराम से देखते हैं,हर मुस्लिम यह तमन्ना रखता है कि वह जिंदगी में एक बार इस घर को ज़रूर देखे। काअबा शरीफ के अंदर ही हजरे आस्वाद है जो जन्नत से आया था, इसे जब लोग हज करने लिए जाते हैं,तो चूमते हैं,वहीं मकामे इब्राहीम भी है, जहां लोग दो रकात नमाज़ पढ़ते हैं.
और वहीं पास ही में आबे ज़मज़म है,इस पानी को दुनिया भर के मुस्लिम पीते हैं और इस्तेमाल करते हैं,लेकिन फिर भी यह पानी कभी खतम नहीं हुआ, बल्कि इस कुनवें से जितना पानी निकाला जाता है,उतना ही बढ़ता जाता है।

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