गौरी लंकेश ने RSS को सबक सिखाया कि औरतें सिर्फ घर संभालने और बच्चे पैदा करने के लिए नहीं: कन्हैया कुमार

January 29, 2018 by No Comments

गौरी लंकेश… दुनिया के लिए वे निडर पत्रकार और बुद्धिजीवी थीं लेकिन मेरे लिए ममतामयी माँ भी थीं। जब बेरोज़गारी और शिक्षा जैसे मसलों पर आवाज़ उठाने के लिए मुझे और दूसरे साथियों को देशद्रोही कहा गया तब उन्होंने हर हाल में साथ खड़े रहने की बात कहकर हमारा हौसला बढ़ाया। अजनबी शहर में भोजन से लेकर कपड़े तक हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ध्यान रखती थीं। हँसी-मज़ाक में ही स्त्रीवाद, लोकतंत्र की गहरी बातें समझा देती थीं। “चाहे कुछ भी हो जाए, डरना नहीं है” – उनकी यह बात हमेशा कानों में गूँजती है।

आज गौरी लंकेश के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें याद करना संघर्ष की उस परंपरा को याद करना है जिसने हमारे देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को ज़िंदा रखने के लिए कई कुर्बानियाँ दी हैं। उन्हें याद करना पत्रकारिता की उस परंपरा को याद करना है जिसमें जनता से जनता की भाषा में बात करते हुए जनवादी मूल्यों को ज़िंदा रखा जाता है। उन्हें याद करना उन महान स्त्रियों के संघर्ष को याद करना है जिन्होंने आरएसएस की उस नारी छवि को तोड़ने का काम किया जिसमें स्त्री को केवल बच्चा पैदा करने और घर सँभालने की भूमिका दी जाती है।

“संविधान ही मेरा धर्म है” – गौरी लंकेश बार-बार यह बात कहती थीं। आज पूरे देश को उनकी इस बात की अहमियत समझनी होगी।

गोलियों से किसी की जान ली जा सकती है लेकिन उसके विचारों को नहीं मारा जा सकता। गोलियाँ असल में केवल गौरी लंकेश पर नहीं, भारतीय लोकतंत्र पर भी चली थीं। अभी तक हत्यारों को गिरफ़्तार नहीं किया गया है। लेकिन हम न चुप बैठेंगे न निराश होंगे। जिन्होंने हत्या का जश्न मनाया, उनकी विचारधारा इतिहास के कूड़ेदान में जाएगी। इसी यकीन और जज़्बे के साथ गौरी अम्मा को मैं सलाम करता हूँ।

(ये आर्टिकल कन्हैया कुमार की फेसबुक वॉल से लिया गया है)

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