काटजू ने कहा उर्दू शा’इरी जैसा दम हिन्दी कविता में नहीं, इस पर कुमार विश्वास ने किया ये…

April 23, 2019 by No Comments

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू अक्सर अपनी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए चर्चा में रहते हैं. उनके कई बयान विवादों में भी आ जाते हैं लेकिन इस बात से उन्हें ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता है. उन्होंने हाल ही में एक ट्वीट किया था जिसको लेकर विवा’द हो गया है. काटजू ने लिखा था कि जो बात उर्दू शाइरी में है वो हिंदी कविता में नहीं है.

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा,”मैंने अक्सर कहा है कि आधुनिक हिंदी कविता में उर्दू कविताओं जैसा दम नहीं है. हालांकि इस पर समर्थक मुझसे नाराज़ भी हो चुके हैं, लेकिन ज़रा इस बार विचार करें. यदि हम ‘सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ को हिंदी भाषा में परिवर्तित करते हैं तो यह ‘शीश कटवाने की इच्छा अब हमारे हृदय में उपस्थित है’ हो जाएगा. यह कैसा लग रहा है? क्या इसमें कोई ‘दम’ है?

उन्होंने आगे फैज़ की नज़्म का उदाहरण भी दिया और कहा फैज़ की इनज्म को देखें, ‘बोल की लब आजाद हैं तेरे बोल ज़ुबां अब तक तेरी है’. इसे हिंदी में लिखेंगे तो यह ‘कहो कि तुम्हारे होंठ स्वतंत्र हैं, कहो कि तुम्हारी जीभ अभी तक तुम्हारी है’. इस पोस्ट पर काटजू ने कवि कुमार विशवास को भी टैग किया था.

विशवास को ये बात पसंद नहीं आयी और उन्होंने उनके ऊपर कहा,”हिंदी-कविता की ‘शक्तिमत्ता’ से आपके अपरिचित रह जाने के पीछे, मेरा कोई योगदान नहीं है! यह आपके निजी अज्ञान, आत्ममुग्धता व अशिक्षा के कारण है! कृपया बार-बार मुझे ‘टैग’ करके अपनी अहमन्य-कुंठा की निरर्थक उलूक-ध्वनि न करें! ईश्वर आपको यथाशीघ्र स्वस्थ करे व आपका ‘न्याय’ करे'”.

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