जानिये क्यूँ लगायी ईरान ने बच्चों के अंग्रेज़ी सीखने पर पाबंदी

January 8, 2018 by No Comments

ईरान में अंग्रेज़ी की शिक्षा को प्राइमरी स्कूल में बैन कर दिया गया है. एक वरिष्ट अधिकारी ने ये जानकारी देते हुए बताया कि इस्लामिक नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर अंग्रेज़ी भाषा को बहुत शुरू में ही बच्चे को सिखा दिया गया तो वो पाश्चात्य कल्चर का ही हो जाएगा. उन्होंने इसे “पाश्चात्य कल्चरल आक्रमण” का नाम दिया.

हाई एजुकेशन कौंसिल के हेड मेहदी नवीद अज़म ने इस बारे में कहा कि सरकारी और ग़ैर-सरकारी स्कूलों में अंग्रेज़ी पढ़ाना क़ानून के ख़िलाफ़ है. उन्होंने कहा कि प्राइमरी शिक्षा में ईरानी कल्चर को ही बताया जाना चाहिए.असल में ईरान में सरकारी स्कूल में अंग्रेज़ी की शिक्षा 12 साल से ऊपर के ही बच्चों को दी जा सकती है लेकिन संपन्न लोग अपने बच्चों को प्राइवेट ट्यूशन के ज़रिये अंग्रेज़ी सिखाते हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ुमेनी अंग्रेज़ी के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं. अपने एक स्पीच में उन्होंने कहा था कि अंग्रेज़ी के विरोध का ये मतलब नहीं कि हम किसी विदेशी भाषा के विरोध में है बल्कि हम विदेशी कल्चर को देश में नहीं प्रमोट करने से रोकना चाहते हैं.

ख़ुमेनी ने कहा था पाश्चात्य विचारक भी कहते हैं कि कोलोनियलिस्ट एक्सपेंशनिस्म की तुलना में बेहतर ये है कि आंतरिक विचारों को मज़बूत करें. इसमें एक बात और समझने वाली है कि ईरान में अभी सरकार के ख़िलाफ़ भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है जिसे कुछ लोग अमरीका द्वारा प्रेरित भी बता रहे हैं. जानकारों के मुताबिक़ अंग्रेज़ी के ख़िलाफ़ ये निर्णय यूँ तो पहले हुआ है लेकिन अब इसकी चर्चा जनता को इशारा देने के लिए है.

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