सऊदी अरब और इराक़ की मदद से दूर होगी भारत की बड़ी परेशानी?

October 15, 2018 by No Comments

नई दिल्ली। इस समय पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी क़ीमतों ने पूरे देश मे हाहाकार मचाया हुआ है। हर दूसरे तीसरे दिन पैट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ने की ख़बरें आ जाती है । अब इस पर एक बुरी ख़बर यह है कि नवंबर से ईरान पर अमेरिका प्रतिबंध लागू हो जायेंगे जिससे स्थिति और भयावह हो सकती है। आप को बता दें कि भारत, ईरान के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है जबकि भारत के कुल कच्चा तेल आयात में ईरान की तीसरी सर्वाधिक हिस्सेदारी है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2017-18 में ईरान से 226 लाख टन कच्चे तेल की खरीद की थी। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ईरान से करीब 250 लाख टन कच्चा तेल का सौदा हुआ है। ऐसे मे ईरान पर प्रतिबंध लगने भारत की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि भारत सरकार ने अपनी और से इस परेशानियों से निपटने के लिए तैयारियां की हुई हैं। इन तैयारियों मे ईरान के साथ रूपये मे लेन देन को लेकर डील भी शामिल है।

जिसके अनुसार भारत से,ईरान कै आयात किये गये तेल की कीमतों का भुगतान रुपये मे किया जा सकता है। ईरान इन रूपयों का इस्तेमाल भारत से दूसरी ज़रूरी चीज़ें आयात करने के लिए कर सकता है। पर इस तरह की व्यवस्था के विकसित होने मे कुछ समय लग सकता है।ऐसे मे कुछ और विकल्पों की ज़रूरत भी होगी।अन्य विकल्पों मे इराक़ और सऊदी अरब से किया गया अनुबंध शामिल है।

जो ईरान से होने वाले कच्चे तेल के आयात मे होने वाली कमी की भरपाई करने के लिए काफी है।इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आइओसी ) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आइओसी के पास दूसरे आपूर्तिकताओं के साथ वैकल्पिक सौदे के अनुबंध मोजूद हैं। जिनके अनुसार पूरे साल के दौरान कभी भी इन से कच्चा तेल मंगाया जा सकता है।आइओसी के अनुसार इस महीने के अंत तक ईरान के कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई संकट नहीं है।

समस्या सिर्फ बाकी पांच महीनों के लिए हो सकती है,जिसकी भरपाई सऊदी अरब, इराक तथा अन्य देशों के साथ हुए अतिरिक्त सौदे की मदद से आसानी से की जा सकती है। भले ही तेल कंपनियां तेल संकट से इंकार कर रही हो लेकिन एक बात तय है कि आने वाले दिनों मे पैट्रोल और डीज़ल की कीमतों मे कोइ कमी नहीं आने वाली है।

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