नए घटनाक्रम के बाद सऊदी अरब को कमज़ोर नहीं पड़ने देगा ये देश…

October 25, 2018 by No Comments

पिछले दिनों अरब जगत में ख़ासी ख़लबली रही. उसकी वजह सीधे तौर पर तुर्की के शहर इस्तांबुल में स्थित सऊदी कांसुलेट में हुई एक हत्-या है. वरिष्ठ सऊदी पत्रकार जमाल खाशोग्गी २ अक्टूबर को किसी निजी काम से सऊदी कांसुलेट में गए थे परन्तु उसके बाद वो वापिस नहीं आए. कई दिनों तक उन्हें तलाश करने की कोशिश भी की गयी, साथ ही सऊदी सरकार पर आरोप भी लगे.

आख़िरकार सऊदी सरकार ने ये मान ही लिया कि वरिष्ठ पत्रकार की ह्त्-या हुई है. इस बारे में अभी और पड़ताल होनी है, तुर्की इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहा है. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन का कहना है कि भले ही ह्त्-या सऊदी कांसुलेट के अन्दर हुई है लेकिन धरती तुर्की की है तो क़ानूनी प्रक्रिया यहीं चलनी चाहिए वहीँ सऊदी अभी इस बारे में थोड़ा बच रहा है. जहाँ तुर्की और सऊदी अरब आपस में अपनी-अपनी बात कह रहे हैं, संयुक्त राज्य अमरीका पर भारी दबाव है.

असल में मृ-तक पत्रकार द वाशिंगटन पोस्ट के लिए काम करते थे और क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के बड़े आलोचक थे. कुछ लोग कह रहे हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस से आलोचनाएँ बर्दाश्त नहीं हो सकीं तो उन्होंने ऐसा संगीन क़दम उठाया.

पश्चिमी देशों में अभी ये माँग ज़ोरों पर है कि सऊदी अरब से सम्बन्ध ख़त्म किए जाएँ. सबसे अधिक दबाव हथियार की डील को लेकर है, अमरीका को हथियारों की बड़ी डील मिली है जिसे वो खोना नहीं चाहता लेकिन सऊदी अरब पर दबाव बनाना भी ज़रूरी है. वहीँ कनाडा ने साफ़ कर दिया है कि अगर वो सऊदी अरब से हथियार डील तोड़ता है तो १ बिलियन डॉलर का नुक़सान कनाडा के टैक्सपेयर को उठाना होगा.

इस पूरी कहानी में एक और नया मोड़ भी आ गया है. रूस ने इस पूरे मामले में अपनी नज़र बनायी हुई है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के क़रीबी मान रहे हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में रूस को नई उम्मीद नज़र आ रही है. वो इस पूरे घटनाक्रम के बहाने कोशिश करेगा कि सऊदी अरब उसके पाले में आ जाए.

फ़िलहाल क्षेत्र में रूस के दोस्त ईरान और सीरिया हैं जबकि तुर्की पिछले दिनों बैलेंस मोड में है लेकिन अभी भी वो अमरीका के ही अधिक क़रीब है. सऊदी अरब अगर रूस के साथ आता है तो बाक़ी अरब देश भी रूस के साथ हो जाएँगे. ऐसी स्थिति में अमरीका कमज़ोर हो जाएगा. यही वजह है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सऊदी अरब का साथ नहीं छोड़ना चाहते.

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