क्या हजरत बेलाल के अज़ान ना देने पर सूरज नहीं निकला था? इंजिनियर मिर्ज़ा तौसीफ साहब ने…

December 12, 2018 by No Comments

बाज़ लोग कहते हैं कि वक़्त या दुनिया सिर्फ 4 बार थमी है।1 तब जब हमारे रसूल मेराज पर गए, दूसरा जब हमारे रसूल हज़रत अली की जांघो पर सर रख कर सो गए थे और असर का वक़्त निकल गया तब प्यारे नबी ने सूरज को फिर से निकलने को कहा, तीसरा तब जब हज़रत फातिमा के सर से दुपटटा सरक गया और उनकी 2 जुल्फे मुबारक दिख गई,चौथा तब जब हज़रत बेलाल ने अज़ान नही दी.
जिनमे से पहली दो बातें तो बिल्कुल सही है लेकिन बाकी की 2 बाते जज़्बात का किस्सा है।फ़ातिमा र .अ . का बहुत आला मक़ाम है उनका एक खास मरतबा है।अल्लाह पाक उनके कदमो की खाक के सदके मे हम सबकी बख्शीश अदा कर दे।मुझे अफसोस है कि ऐसी आला हस्ती के बारे में ऐसी बाते गढना अच्छी बात नहीं है।इस बात का कोई सबूत सही तरीके से नहीं है।आप बुखारी उठा ले,मुस्लिम उठा ले ,यहाँ तक कि आप क़ुरान उठा लीजिये.

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लोग कहते हैं कि बिलाल में अजान नहीं दी तो शहरी नहीं हुई, ऐसा कोई बात या नहीं हुआ है यह सारी मनगढ़ंत बातें हैं इन बातों पर ध्यान ना दें। अगर आप बुखारी की सुने तो एक हदीस बताई गई है नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम कहीं से वापस तशरीफ ला रहे थे एक वादी में ठहरे तब हजरत बिलाल को हुकुम दिया कि यहां पर ठहरो और मुझको फज्र में जगा देना.
हजरत बिलाल ने चट्टान से टेक लगा रखी थी ताकि उनको नींद ना आ जाए और आंखें खोलकर में बैठा हुआ था लेकिन ऐसी नींद आई थी जब मेरी आंखें खुली तब सूरज मेरे सामने था जब सब लोग उठ गए तब सरकार ने फरमाया कि सब लोग वादी से बाहर निकलो सब ने बाहर जाकर वजू बनाया और फिर हमारे नबी ने इस्तेमा के तौर पर फज्र की नमाज़ को कजा अदा फरमाया.

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यह है सही वाकया। लोग बेवजह इस बात को बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं। बहुत प्यारी हदीस इस बात को नहीं बता रही हूं कुरान में ऐसा कुछ भी नहीं है लोगों का काम है आधी अधूरी बातों को बढ़ा चढ़ाकर फैलाना आने वाली पीढ़ी के लिए सही नहीं है ऐसा करने पर हमारी आने वाली पीढ़ी को गलत जानकारी है क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो बड़े उन्हें बताते हैं

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