क्या इब्लीस का पोता हमा अभी भी जिंदा है?…हज़रत उमर(र.अ.) ने फ़रमाया

March 28, 2019 by No Comments

हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ी अल्लाहु ताला अनहु से रिवायत है कि एक रोज़ हम हुज़ूर सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के हमराह तिहामा की एक पहाड़ी पर बैठे थे, कि अचानक एक बूढ़ा हाथ में लाठी लिए हुए हुज़ूर सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के सामने हाज़िर हुआ और सलाम अर्ज़ किया। हुज़ूर सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया और फ़रमाया,इस की आवाज़ जिन्नात की सी है।
फिर आप सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने इस से दरयाफ़त किया तू कौन है?उसने अर्ज़ किया हुज़ूर मैं जिन हूँ मेरा नाम हामा है,मैं बेटा हीम का और हीम बेटा लाकीस का और वह बेटा इबलीस का है।हुज़ूर सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तो गोया तेरे और इबलीस के दरमयान दो पुश्तें हैं फिर फ़रमाया अच्छा ये बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है?
उसने कहा या रसूल अल्लाह जितनी उम्र दुनिया की है उतनी ही मेरी है कुछ थोड़ी सी कम है।उसने कहा जिन दिनों क़ाबील ने हाबील को क़तल किया था उस वक़्त में कई बरस का बच्चा ही था,मगर बात समझता था,पहाड़ों में दौड़ता फिरता था और लोगों का खाना चोरी कर लिया करता था और लोगों के दिलों में वस्वसे भी डाल लेता था कि वो अपने ख़वेश वाक़रबा से बदसुलूकी करें।
हुज़ूर सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तब तो तुम बहुत बुरे हो, उसने अर्ज़ की हुज़ूर मुझे मलामत ना फ़रमईए इस लिए कि अब मैं हुज़ूर की ख़िदमत में तौबा करने हाज़िर हुआ हूँ या रसूल अल्लाह!मैं य हज़रत-ए-नूह अलैहिस-सलाम से मुलाक़ात की है और एक साल तक उनके साथ उनकी मस्जिद में रहा हूँ.
इस से पहले में उनकी बारगाह में भी तौबा कर चुका हूँ,हज़रत हूद,हज़रत याक़ूब,और हज़रत-ए-यूसुफ़ अलैहिस-सलाम की सोहबतों में भी रह चुका हूँ, और उनसे तौरात सीखी है और उनका सलाम हज़रत-ए-ईसा अलैहिस-सलाम को पहुंचाया था,ए नबियों के सरदार हज़रत-ए-ईसा अलैहिस-सलाम ने फ़रमाया था कि अगर तू मुहम्मद सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम से मुलाक़ात करे तो मेरा सलाम उनको पहुंचाना,सो हुज़ूर!अब में इस अमानत से बरी होने को हाज़िर हुआ हूँ और ये भी आरज़ू है कि आप अपनी ज़बान हक़ तर्जुमान से मुझे कुछ कलाम-उल-ल्लाह तालीम फ़रमईए।
हुज़ूर अलैहिस-सलाम ने इस सूरा-ए-मुर्सलात,सूरे इख़लास और मऊज़तीन और इसके इलावा कुछ सूरतें तालीम फरमाई,और ये भी फ़रमाया कि हामा जिस वक़्त तुम्हें कोई एहतियाज हो फिर मेरे पास आजाना और हमसे मुलाक़ात ना छोड़ना।दोस्तों इस बारे में लोग सवाल पूछते रहते हैं कि क्या अभी भी इबलीस और उसकी औलाद ज़िंदा हैं,तो इसके बारे में कहा जाता है कि हाँ अभी भी इबलीस ज़िंदा है.
लेकिन एक वक़्त तक फिर उसको भी मौत आ जाएगी।इस बारे में इमाम तबरी ने अपनी तफ़सीर में बयान किया है कि इबलीस को जब जन्नत से निकाला गया था तो वह अल्लाह ताला से कहने लगा मेरे रब मुझे क़ियामत के दिन तक मोहलत दीजिए,अल्लाह तआला ने फ़रमाया तुझे मोहलत दी गई, एक मुतय्यन वक़्त के दिन तक” तो उसे क़ियामत के दिन तक मोहलत नहीं दी गई बल्कि एक मालूम वक़्त के दिन तक मोहलत दी गई है और वो दिन है जिस दिन पहला सूर फूँका जाएगा तो आसमान व ज़मीन में जो भी है सब बेहोश हो कर मर जाऐंगे।

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