क्या मोबाइल में मौजूद कुरान की आयतों को डिलीट कर सकते है?

March 11, 2019 by No Comments

अल्लाह ताला ने कुरान पाक में फरमाया है कि هَـذَا بَلاَغٌ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُواْ بِهِ وَلِيَعْلَمُواْ أَنَّمَا هُوَ إِلَـهٌ وَاحِدٌ وَلِيَذَّكَّرَ أُوْلُواْ الْأَلْبَابِ.ये (क़ुरआन) लोगों के लिए कामिलन पैग़ाम का पहुंचा देना है,ताकि उन्हें उस के ज़रीया डराया जाये और ये कि वो ख़ूब जान लें कि बस वही (अल्लाह) माबूद-ए-यकता है और ये कि दानिशमंद लोग नसीहत हासिल करें।
सय्यदना उस्मान-ए-ग़नी रज़ी अल्लाहु अनहु अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वाला वसल्लम से रिवायत करते हैं कि आक़ा सललल्लाहु अलैहि वाला वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया:خيرکم من تعلم القرآن وعلمة.तुम में से बेहतर वो शख़्स है जो कुरान-ए-मजीद को ख़ुद सीखे और दूसरों को सुखाय।
बुख़ारी,दूसरे मुक़ाम पर आक़ा अलैहिस-सलाम ने इरशाद फ़रमाया: بلغوا عنی و لو آية….मेरी तरफ़ से अगर एक आयत भी (तुम्हारे पास) हो तो वो लोगों तक पहुँचाओ।बुख़ारी

मज़कूरा बाला तसरीहात से मालूम हुआ कि क़ुरआन-ओ-हदीस की तालीमात ख़ुद सीखना और दूसरों को सिखाना भलाई और ख़ैर का काम है।अच्छे मुअल्लिम की ख़ुसूसीयत होती है कि वो तालीम-ओ-ताल्लुम के लिए जदीद तरीक़ों को ब-रू-ए-कार लाता है।इसी तरह अच्छे दाई की ज़रूरत भी ऐसे जदीद तरीक़-ए-इबलाग़ हैं जिनसे पैग़ाम जल्द और सहल अंदाज़ में पहुंचाया जा सके।
ताकि अहल-ए-इस्लाम, इस्लाम की तालीमात को समझ सकें और ग़ैर मुस्लिम,इस्लाम का मुताला कर सकें जिससे उनकी इस्लाम की तरफ़ रग़बत हो।
लिहाज़ा हज़फ़ (Delete) होने के ख़ौफ़ से क़ुरआन-ओ-हदीस को जदीद ज़राए इबलाग़ से दूर रखना उनकी तरवीज-ओ-इशाअत को रोकने के मुतरादिफ़ है।तमाम जदीद ज़राए इबलाग़ को इस्तिमाल कर के तालीमात-ए-इस्लाम को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना हमारी ज़िम्मेदारी है।

मोबाइल में करानी आयत रखना या किसी को भेजना क़ुरआन-ए-करीम की बे-अदबी नहीं है और ज़रूरत पर करानी आयत डिलीट कर देना भी दरुस्त है।जब ज़रूरत हो मोबाइल में कुरान के आयात को रख सकता है,और पढ़ सकता है,वहीं मोबाइल खराब होने पर उसे डिलीट भी कर सकता है।या मोबाइल में जगह न रह जाये तो भी डिलीट कर सकता है।

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