क्या सोशल मीडिया पर मज़बूत हो रही है कांग्रेस?

जब 2014 के लोकसभा चुनाव हुए थे तो ये माना गया था कि सोशल मीडिया का भाजपा की बड़ी जीत में बहुत बड़ा रोल है. उस दौर में सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ता लगातार हावी थे. अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव होने में बहुत देर नहीं है और कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी अब बस होने ही को हैं. जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं वहाँ भी मुक़ाबला सीधा भाजपा और कांग्रेस में है.अभी हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने जब बर्कले में संबोधन किया तो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ट्विटर पर उसे ट्रेंड करने में वक़्त नहीं लगाया. एक दौर था जब आम आदमी पार्टी और भाजपा सोशल मीडिया पर बहुत मज़बूत थे लेकिन अब कांग्रेस ने भी ज़बरदस्त पकड़ बना ली है.

हमने पड़ताल करने की कोशिश की कि सोशल मीडिया पर इस वक़्त किस पार्टी का माहौल बन रहा है और कौन सी पार्टी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर आगे आ रही है.

पिछले दिनों हमने ये पाया है कि सोशल मीडिया पर भाजपा के समर्थक पहले की तुलना में अब कम हो गए हैं जबकि कांग्रेस पार्टी के समर्थकों की संख्या अचानक से बहुत बढ़ गयी है. विपक्ष के कई नेताओं के ट्विटर पर सक्रिय होने की वजह से भाजपा कमज़ोर लग रही है. इसके इलावा सत्ताधारी भाजपा की नीतियों के नाकामयाब होने की वजह से भी लोगों की नाराज़गी भाजपा के प्रति बढ़ी है. youtube पर कई ऐसे चैनल हैं जो एक समय तक भाजपा का पुरज़ोर समर्थन करते थे लेकिन अब वो उतनी ही पुरज़ोर बुराई भी भाजपा की ही कर रहे हैं.


एक कारण पार्टी की सोच में भी है. जहां 2014 से पहले कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल सोशल मीडिया के लोगों को वर्चुअल दुनिया मानते थे अब वो उन्हें लगता है कि ये सब असर करता है. कांग्रेसी भी मानते हैं कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत का प्रमुख कारण सोशल मीडिया पर की गयी कैमपेनिंग है और इसीलिए अब कांग्रेस ने भी एक पूरी टीम तैयार कर ली है. इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने अब अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए ट्विटर का सहारा लेना शुरू कर दिया है. साथ ही फेसबुक लाइव और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का भी फ़ायदा उठाया जा रहा है.

वहीँ भाजपा नेताओं को भी अब लगने लगा है कि सोशल मीडिया पर अब उनकी पकड़ कमज़ोर हो रही है. हालाँकि ये पाया गया है कि फ़ेक न्यूज़ डालने वाले अधिकतर भाजपा समर्थक हैं लेकिन कांग्रेस ने अब जो पकड़ सोशल मीडिया पर बनायी है वो भाजपा के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है. यही वजह है कि अब भाजपा के नेताओं को बार बार कहना पड़ रहा है कि सोशल मीडिया पर भरोसा ना करें.

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