“लड़की की जींस-कमीज़ में हाथ डालना राष्ट्रवाद है क्या?”

September 25, 2017 by No Comments

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की पूरे देश में निंदा हो रही है. लड़कियों को सुरक्षा दिए जाने और छेड़खानी करने वाले लड़कों पर कार्यवाही की मांग करने वाले लड़के-लड़कियों को कल रात पुलिस ने दौड़ा कर पीटा. इस लाठीचार्ज के बाद देश भर से BHU के बच्चों को समर्थन मिल रहा है.

इस सिलसिले में हमने लखनऊ विश्विद्यालय  के कई छात्रों से बात की. बीए की छात्रा रूचि यादव कहती हैं,”यूनिवर्सिटी प्रसासन को क्या लगता है कि यूनिवर्सिटी 2 अक्टूबर तक बंद करने से सब ठीक हो जाएगा। पर ये तो बिल्कुल सीधे सीधे महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे है । PM बस महिलाओं की सुरक्षा की बात करते हैं और करते तो कुछ भी नही हैं । एक तो चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी कि पहले तो छोड़खानी , फिर उसके ऊपर कोई एक्शन नही लिया ओर फिर लाठीचार्ज करवा दिया ओर उसके बाद तो हद ही कर दिया कि 2 तारीख़ तक कैम्पस बन्द करने का क्या मतलब है है और ज़बरदस्ती बच्चो को होस्टल खाली करने के लिए मजबूर करने का क्या मतलब है इनका light and water supply बन्द कर के क्या साबित करना चाहते है.” छात्र सौरभ सिंह बनारस में हुई पुलिसिया कार्यवाही की निंदा करते हैं. उन्होंने कहा की छात्राओं के साथ गुंडागर्दी की घटनाओं पर कार्यवाही करने के बजाय उन्हीं छात्राओं पर कार्यवाही करना शर्मनाक है. विश्विद्यालय में बीए के छात्र वैभव मिश्रा इस मुद्दे पर बात करते हुए कहते हैं कि ऐसी घटनाएँ लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी होती हैं. वह कहते हैं कि प्रशासन का रवैया बेहद निंदनीय है और यहाँ भी ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं कि छात्राओं को कुछ छात्र परेशान करते हैं… और जब लड़कियाँ अपनी शिकायत लेकर प्रॉक्टर से मिलती हैं तो उन्हीं पर सारा दोष दे दिया जाता है.

इस सिलसिले में हमने देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले कुछ और भी लोगों से बात की. समाज के अलग अलग तबक़ों से जुड़े लोगों ने BHU की छात्राओं का पक्ष लिया.

विविध भारती में एनाउंसर नेहा शर्मा कहती हैं,”लड़कियाँ कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं..और जब-जब वो अपनी सुरक्षा के लिए सवाल उठाती हैं तो उन पर ही कई नियम थोपे जाते हैं..चाहे कपड़ों पर हों या बाहर निकलने को लेकर या फिर बोलने के लिए ही..हर नियम लड़कियों के लिए ही बनाए जाते हैं।”

यूथ कांग्रेस से जुड़े शैलेश शुक्ला भाजपा सरकार की निंदा करते हुए कहते हैं,”कैंपस में अपनी सुरक्षा के लिए गार्ड और सीसीटीवी की माँग करने वाली छात्राओं को योगी सरकार और विवि प्रशासन ने रात में दौड़ा कर पीटा | जैसे ही हम सोचते है कि ये सरकार और कितना गिरेगी, तुरंत ही ये और भी नीचता पर उतर आती है|इससे ये साफ़ ज़ाहिर होता है कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के इनके नारे और महिला सुरक्षा के इनके दावे जुमला भर है|”

छात्र-नेता ज्योति राय की राय में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में जिस प्रकार लड़कियों पर लाठियां चलाई गयी है उसने एक बात साफ़ कर दी है की महिलाओ के प्रति संवेदना और सुरक्षा इस सरकार में दिखावा मात्र है. उन्होंने कहा,”विश्वविद्यालयों से उठती छात्रों नवजवानों की आवाज़ को जिस प्रकार सरकारी गुंडों का प्रयोग करके सरकारों द्वारा दबाया जा रहा है उसके खिलाफ प्रदेश और देश भर के छात्रों नवजवानों को एकत्र होकर उनके गुरुर को उखाड़ फेकना होगा”

लखनऊ में समाजसेवी शाह मुहम्मद अफ़ज़ल कहते हैं,”पिछले दिन बीएचयू में हुई छात्रों पे लाठी चार्ज एक शर्मनाक हरकत है एक तरफ आप बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारे देते हैं.. ऐंटी रोमियों का गठन करते हैं मगर फेल ..कोई सफलता नही मिलती है और दूसरी तरफ हक़ की मांग की… सुरक्षा की मांग की… तो कोई हल न निकाल के आप ने उन देवियों पे लाठी चलाई और उस जगह पे जो जगह अपना एक अलग मुकाम रखता है पूरे मुल्क में  पवित्र ओर एतिहासिक जगह पे छात्रों पे लाठी चलाई मेरा मानना है कि सीता पे राधा पे मरियम का उत्तर प्रदेश सरकार ने अपमान किया.”

खतौली से शाइर ऐन इऱफान कहते हैं,”BHU पर लाठीचार्ज शर्मनाक है। ये प्रजातंत्र का गला घोंटने जैसा है। सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनना भी गवारा नहीं कर रही। क्या ऐसे ही होगा भारत निर्माण क्या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा खोखला है। जहाँ गाय को माता कहा जा रहा है वहाँ बेटियों पे ये अत्याचार शर्मनाक है।”

BHU VC के उस बयान जिसमें वह कहते हैं कि राष्ट्रवाद को यूनिवर्सिटी से ख़त्म नहीं होने देंगे की निंदा हो रही है. फेसबुक प्रोफाइल पुष्पा यादव ज़रिये ये कहती हैं,”लड़की की जीन्स-कमीज में हाथ डालना, दुपट्टा खींचना, उन्हें देख के हस्तमैथुन करना….ये कब से राष्ट्रवाद हो गया भई…..मतलब इस हद तक बीमार होते है संघी कि छेड़खानी तक को राष्ट्रवाद कहते है”

समाजवादी पार्टी से जुड़े कुंवर रितेश सिंह इस मुद्दे पर कहते हैं,”बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ..और फिर बेटियों को पिटवाओ …शर्म करो.”

शालिनी मालवीय अपनी फेसबुक पोस्ट पर कहती हैं,”एक तरफ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और दूसरी तरफ आघी रात बेटियों पर ही लाठियाँ बरसाओ छेड़छाड़ करने वालों की हिम्मत और बढ़ाओ .. आखिर लड़कियों पर लाठीचार्ज करके क्या मिला ?”

#इस मुद्दे पर हम कल जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी, दिल्ली का पक्ष जानने की कोशिश करेंगे.

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