लड़कों के हॉस्टल को खोलने को राज़ी नहीं LU प्रशासन; तिलक महिला छात्रावास है गंदगी और बदबू से लबरेज़

लखनऊ: लखनऊ विश्विद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच लगातार टकराव की स्थित बनी हुई है. छात्रों का कहना है की आचार्य नरेंद्र देव छात्रावास को खोला जाए जबकि प्रशासन इस बात को मानने में आनाकानी कर रहा है. इतना ही नहीं विश्विद्यालय प्रशासन उन छात्र नेताओं पर कार्यवाही भी कर रहा है जो छात्रों की आवाज़ को बुलंद कर रहे हैं. १ अगस्त को हुए धरने के बाद एक तो छात्रों पर पुलिसिया कार्यवाही की गयी जिसमें छात्रों पर बुरी तरह लाठी चार्ज भी किया गया तो दूसरी ओर 12 छात्रों को निलंबित भी कर दिया गया जिसमें एक छात्रा भी शामिल हैं.

इस बारे में आज विनय विक्रम सिंह द्वारा नरेन्द्रदेव छात्रावास को जल्द से जल्द आवंटित किये जाने तथा निलम्बित छात्रों का निलंबन तत्काल प्रभाव से निरस्त किये जाने को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा. पूजा शुक्ला ने भी इसी मांग के साथ कुलपति को पत्र लिखा.

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छात्र नेता ज्योति राय ने कहा कि क्यूंकि छात्रसंघ बहाल नहीं है इसलिए प्रशासन अपनी मर्ज़ी की करता रहता है और छात्र नेताओं को लगातार बदनाम करने का सिलसिला जारी है. उन्होंने कहा कि फ़िलहाल मुद्दा बजट का है और इसके लिए बड़े तौर पर राज्य की सरकार ज़िम्मेदार है. ज्योति ने कहा की VC एसपी सिंह बजाय बजट के सिलसिले में सरकार से बात करने के वो छात्रों पर ही सारा बोझ लादने में लगे हैं.

तिलक छात्रावास है गंदगी से लबरेज़
लखनऊ विश्विद्यालय में हॉस्टल की स्थिति बहुत गंभीर है. तिलक महिला छात्रावास की स्थिति इस क़दर बुरी है कि कुछ छात्राएं तिलक छात्रावास को अन्दर से देखने के बाद उसकी काउंसलिंग से पीछे हट गयीं. जर्ज़र कमरे और गिराऊ छज्जे तो हैं ही गंदगी इतनी है कि बदबू के सिवा कुछ नहीं. कुछ फोटोज हमें प्राप्त हुए हैं.


कैसा है कैंपस का माहौल?
विश्विद्यालय में बीए तृतीय वर्ष के छात्र वैभव मिश्रा ने बताया कि आम छात्रों को समझ नहीं आता कि इतना पुलिस बल क्यूँ लगाया गया है. उन्होंने कहा कि हर सरकार अपनी विचारधारा छात्रों पर थोपना चाहती है जोकि ग़लत है. पाश्चात्य इतिहास के छात्र सौरभ सिंह ने हमसे बात करते हुए कहा कि फ़ीस लगातार बढती जा रही है लेकिन सुविधाओं के नाम पर विश्विद्यालय में कुछ नहीं है.

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