जेल में बंद लालू से भी विरोधियों को खतरा, बढ़ रही पॉपुलैरिटी से हो रहे परेशान

March 21, 2018 by No Comments

बिहार की सियासत में एक नाम ऐसा है जिसे कोई भी इग्नोर नहीं कर सकता और वो नाम है लालू प्रसाद यादव का। राजद सुप्रीमो भले ही चारा घोटाले के मामले में सज़ा होने के बाद जेल में हैं, उनकी लोकप्रियता में लेकिन इससे कोई कमी नहीं आयी है बल्कि वो और लोकप्रिय हुए हैं।लालू के जेल जाने के बाद राजद को अपने कंधों पर उनके बेटे तेजश्वी यादव ने संभाला है। तेजश्वी ने जिस तरह से अररिया लोकसभा उपचुनाव में पार्टी में जोश भरा है उससे लगता है कि आगे उनके विरोधियों की राह मुश्किल है।

असल में विरोधी जितना लालू और उनके परिवार के ख़िलाफ़ हमला बोलते हैं, उतना ही अधिक समर्थन उन्हें मिलता जाता है। हाल ही में दरभंगा में हुई एक हत्या के मामले में बिहार भाजपा और केंद्रीय भाजपा में अनबन की स्थिति नज़र आयी। एक तरफ़ गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय कह रहे हैं कि हत्या का कारण किसी चौक का नाम नरेंद्र मोदी चौक कर देना था तो दूसरी ओर सुशील मोदी ने इसे पुराना ज़मीनी विवाद बताया है। ज़ाहिर है सुशील मोदी वही बात कह रहे हैं जो बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं।

भाजपा के कुछ नेता इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में थे और ये सोचते थे कि अगर इस मुद्दे को और हवा दी जाती है तो यादव वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है लेकिन ऐसा होना जदयू के लिए घातक है। दूसरा क्षेत्रीय नेता इस बात को भली-भांति समझते हैं कि यादव वोटों का बिखराव करने की कोशिश में वो अपना और नुक़सान करवा सकते हैं।

देखा जाए तो यादव वोट फ़िलहाल राजद के साथ है और ऐसी कोई स्थिति नज़र नहीं आ रही कि वो राजद का साथ छोड़े। जेल में बंद होने के बावजूद भी लोगों की सहानुभूति उनके साथ जुड़ी हुई है। बिहार में इस बात की गली गली में चर्चा है कि आख़िर चारा घोटाले में जगन्नाथ मिश्रा और जगदीश शर्मा को बरी क्यूँ किया गया और लालू यादव को सज़ा क्यूँ दी गई। इसको लेकर बिहार में नारे भी लग रहे हैं- “लालू यादव को जेल क्यूँ, और मिश्रा को बेल क्यूँ”.

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