लालू यादव के कमाल की वजह से दौड़ पड़ी थी रेल… और अब फिर फिसड्डी हुआ मंत्रालय?

पटना: एक समस्य था जब लगातार लोग रेलवे को प्राइवेट में दिए जाने की बात करते थे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपाई की सरकार के वक़्त ये बात आम हो चली थी कि रेल को प्राइवेट सेक्टर में दिया जाना चाहिए लेकिन 2004 का चुनाव जीत कर जब UPA ने सरकार बनायी तो उसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री का पद संभाला.

अचानक ही रेल की कया पलट गयी. ऐसा लगा मानो काम होने लगे हैं. इस दौरान रेलवे की सुरक्षा पर तो काम हुआ ही, साथ ही ग़रीब रथ जैसी ट्रेनें भी चलीं. स्टेशन पर एटीएम की दुकानें खुल जाने से लोगों को सुविधा मिली और रेलवे को किराया.लालू ने मालभाड़े की प्रक्रिया को आसान किया,लालू ने प्लास्टिक कप पर पाबंदी लगा दी और कुल्हड़ का प्रयोग शुरू कराया.वो लालू ही थे जिन्होंने जनरल डिब्बे में गद्दी वाली सीट लगवाई.इतना ही नहीं ये सारी सुविधाएं उन्होंने बिना किराया बढाए दीं. हर एक चीज़ बेहतर नज़र आ रही थी और इसके लिए उन्हें विदेशों में भी ख़ूब सम्मान मिला.

उनके बाद लेकिन जो मंत्री आये हैं वो उस तरह का काम नहीं कर पाए हैं जैसा लालू ने किया था. परन्तु मौजूदा रेल मंत्री से पहले जो रेल मंत्री थे सुरेश प्रभु उनके कार्यकाल में रेलवे में जिस प्रकार हादसे हुए वो चिंता की बात रही शायद इसीलिए पियूष गोयल को मंत्रालय सौंपा गया है.

गोयल को फ़िलहाल हुई दुर्घटनाओं के लिए दोष नहीं दिया जा सकता क्यूँकि उन्हें कार्यकाल संभाले एक महीना भी नहीं हुआ है.आज हुए हादसे से एक बार फिर रेलवे की पोल खुल चुकी है. एक तरफ़ जहाँ बुलेट ट्रेन की बात हो रही है तो दूसरी ओर बेसिक चीज़ें नहीं मौजूद हैं.

आज के हादसे में प्रशासन की लापरवाही नज़र आती है. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने पुराने ट्वीट दिखाए हैं जिनमें दावा किया गया है कि जिस ओवर ब्रिज पर हादसा हुआ है इसको लेकर एक व्यक्ति ने लगातार शिकायत की थी परन्तु कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है.

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