लेफ़्ट उदय को नयी शुरुआत देगा लेनिन की मूर्ति का ढहाए जाना

March 6, 2018 by No Comments

रूसी क्रान्ति के महानायक व्लादिमीर लेनिन का नाम भारत में कितने लोग जानते होंगे इसको लेकर अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन ये ज़रूर है कि ये संख्या बहुत बड़ी नहीं होगी. लेनिन के चाहने वाले भारत में भी हैं लेकिन अधिकतर ये वो लोग हैं जो वामपंथ विचारधारा से जुड़े हैं या जिन्होंने इतिहास का अध्ययन किया है. रूस में ग़रीबों के हक़ की क्रांति में अहम् भूमिका निभाने वाले लेनिन की मूर्ति त्रिपुरा में ढहा दी गयी है. उत्तर भारत के लोगों को तो शायद ये भी ना पता हो कि देश में कहीं लेनिन की मूर्ति भी हो सकती है.

इस मूर्ति की चर्चा तब भी इतनी नहीं हुई होगी जितनी पिछले दो दिन में हुई है. उसकी वजह ये है कि दक्षिणपंथी संघठन से जुड़े लोगों ने इस मूर्ति को भाजपा की जीत के जश्न में ढहा दिया है. ज़ाहिर है, इस बात का झटका देश के उन सभी लोगों को लगा है जो वामपंथ से थोड़ा भी जुड़ाव रखते हैं, झटका उन्हें भी लगा है जो लिबरल हैं. सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की तुलना तालिबान के द्वारा बौद्ध की मूर्ति के गिराए जाने से कर रहे हैं. असल में लेनिन कीई मूर्ति के गिरने से जो सबसे बड़ी चीज़ हुई है वो ये कि लेनिन की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है.

लेनिन के बारे में लोग सोशल मीडिया पर कई तरह के बयान साझा कर रहे हैं. देश के उन लोगों को भी लेनिन के बारे में मालूम चल रहा है जिन्हें ये तक नहीं पता कि दुनिया में कभी सोवियत यूनियन नाम का भी कोई देश था. ऐसे में मूर्ति गिराने से दक्षिणपंथी लोगों को फ़ायदा कम नुक़सान ही ज़्यादा हुआ है. सालों से अपने क़िले में क़ैद लेफ़्ट अब बाहर आ गया है. त्रिपुरा चुनाव के नतीजों के बाद से ही लेफ़्ट के कार्यकर्ता सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक नज़र आने लगे हैं. देखा जाए तो लेफ़्ट और राईट की जंग में अभी राईट बहुत आगे ज़रूर है लेकिन राईट ही लेफ़्ट को आगे आने का मौक़ा भी दे रहा है.

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अरग़वान रब्बही

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