लाइव बहस के दौरान कुर्सी छोड़ भिड़ गए VHP नेता और मौलाना

नई दिल्ली: भारत मे कई-कई चैनल रोजाना शाम की अपनी स्टूडियो चर्चाओं में एक साथ दस-दस मेहमान रखकर एक-दूसरे पर चीखने-चिल्लाने का मौका मुहैया कराते हैं. पूरा ‘शो’ तमाशा बन जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ जी न्यूज के एक टॉक जिसका विषय था ‘संघ के ‘रथ’ से श्रीराम को मिलेगा राम मंदिर?’, में उस वक्त बहस इस कदर गर्म हो गई कि अपना पक्ष रखने आए दो मेहमान कुर्सी छोड़ उठ खड़े हुए और आपस में भिड़ गए. हालांकि, नौबत हाथापाई की आती इससे पहले ही एंकर सचिन अरोड़ा और उस वक्त स्टूडियो में मौजूद संघ के जानकार अवनिजेश अवस्थी ने माहौल संभाल लिया. आपको बता दें कि यह विवाद टॉक शो में हिस्सा लेने के लिए टीवी स्टूडियो पहुंचे वीएचपी प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी और मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना साबिर उल कादरी के बीच हुई थी.

सांकेतिक इमेज

यह कोई पहली घटना नहीं, जब किसी न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में हो रही चर्चा (लाइव प्रसारण) के दौरान तीखी तकरार हुई. इससे पहले दो हिन्दी न्यूज़ चैनलों के स्टूडियो में चर्चा में शामिल मेहमानों के बीच मारपीट भी हो चुकी है. एंकर और चर्चा में शामिल मेहमानों या कथित विशेषज्ञों के बीच तीखी तकरार के तो असंख्य उदाहरण हैं. खबर हो या बहस, रिपोर्टिंग हो या दर्शक-आधारित शो, हमारे ज्यादातर न्यूज़ चैनलों में उग्र-उत्तेजक विचारों-भाषा का बोलबाला बुरी तरह बढ़ा है.

सड़क की झगड़ालू और उग्रता भरी भाषा हिन्दी चैनलों के पर्दों पर धड़ल्ले से दिखती है.पर्दे की यही भाषा ज्यादा उग्र होकर फिर सड़क पर लौटती है. सड़क और टीवी, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और एक-दूसरे को सिखा रहे हैं. पिछले दिनों हमने देखा, चुनाव के दौरान उत्तेजक और असयंमित भाषा का प्रयोग करने वाले नेताओं को एक तरफ मीडिया में कोसा जा रहा था लेकिन दूसरी तरफ उन्हें बढ़ा-चढाकर दिखाया और सुनाया भी जा रहा था.

फाइल

इस प्रक्रिया में उनका कद भी बढ़ रहा था. यह महज संयोग नहीं कि इनमें कई अनजान से लोग राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए. कुछ राज्यों में मंत्री तक बन गये. अपने टीवी चैनलों में कभी कश्मीर, भारत-पाक या भारत-चीन के रिश्तों, गौ-रक्षा, लव-जिहाद या मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों पर बहस होती है तो स्टूडियो का माहौल युद्धमय हो जाता है.ऐसा लगता है, शब्दों के गोले चल रहे हैं. अब आम राजनीतिक बहसों में भी माहौल युद्धमय होता जा रहा है. सियासत, समाज और मीडिया में उत्तेजक भाषा और विचार बड़ी जगह पा रहे हैं.

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