LU में आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की मांग पर “गूँगा-बहरा” प्रशासन; “छात्र-विरोधी हैं सरकारें”

लखनऊ: “लखनऊ विश्विद्यालय छात्रसंघ बहाली” मोर्चा के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. 8 दिन तक धरना प्रदर्शन करने के बाद आख़िर छात्रों को आमरण अनशन का सहारा लेना पड़ा है. आमरण अनशन का आज तीसरा दिन है और रात तक की ख़बर के मुताबिक़ दो छात्र गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं. इसके बावजूद भी छात्रों की माँगों को मानने की बात तो दूर प्रशासन उनकी बात सुनने तक को तैयार नहीं है.

देर रात हमारी प्रशांत मिश्रा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि दो छात्र हिमांशु पुरैनी और गौरव त्रिपाठी बीमार हो गए हैं और उन्हें एम्बुलेंस के ज़रिये अस्पताल पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस की व्यवस्था भी प्रशासन ने नहीं करायी थी जबकि आमरण-अनशन की स्थिति में ऐसा किया जाता है.

छात्र-नेता ज्योति राय ने हमसे कहा,”जिस प्रकार से पूरे देश के विश्विद्यालयों में लगातार घटनाएँ हुई हैं उससे यही कहा जा सकता है कि प्रदेश और केंद्र सरकारें छात्र विरोधी हैं”. उन्होंने कहा,”दस दिन से लगातार धरने पर छात्र बैठे हैं लेकिन प्रशासन के कान में जूँ तक नहीं रेंगी..और इतना ही नहीं इन छात्रों को प्रशासन अब छात्र ही मानने से इनकार कर रहा है.”

इस मामले में वैभव मिश्रा ने हमसे बात करते हुए कहा कि छात्रों की जान पर बन आयी है लेकिन प्रशासन को जैसे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ता.

प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहता है कि क्यूँकि मामला कोर्ट में लामबंद है इसलिए वो इस पर कुछ नहीं कर सकते. इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी छात्रों के आन्दोलन के बारे में कोई बयान जारी नहीं हुआ है. बताया जा रहा है कि कुल 12 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं जिसमें अलग अलग राजनीतिक संघठनों के भी छात्र-नेता हैं.

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