LU छात्रसंघ बहाली मोर्चा को छात्र-नेता ज्योति राय का ख़त-‘प्रशासन लूट-खसोट में लगा है, इनको अपना हितैषी ना मानें’

September 21, 2017 by No Comments

नमस्कार मित्रों ,

मैं ज्योति राय , आपका साथी

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव सन 2006 के बाद से नहीं हुए और इसको लेकर लगातार आन्दोलन चलते रहे 2017 का यह सत्र है २०१२ के सत्र में चुनाव कराने की घोषणा की गई थी और तब से अब तक आश्वासनो का एक भारी पुलिन्दा प्रशासन और सरकार ने आन्दोलनरत साथियों को थमाया है और आन्दोलन फिर शिथिल पड़ गया. वर्तमान में मै शहर से बाहर हूँ मेरा यह पत्र महज इसलिए है कि जब हवन हो रहा हो तो एक आहुति उसमे मेरी भी होनी चाहिए और मैं स्वयं भी दो – चार रोज में आकर शरीक होने के साथ सक्रिय भागीदारी करूँगा. साथियों लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली मोर्चा को मैं बधाई देता हूँ की उन्होंने फिर से इस आन्दोलन के माध्यम से आपने हक- हकूक की लड़ाई की शुरुआत की है जिसमे सभी छात्र संगठनों ने दलगत राजनीती से अलग हटकर छात्रों के पक्ष में एकता और प्रतिबद्धता दिखाई है सोशल मीडिया तथा खबरों के माध्यम से मैं आन्दोलन तथा संघर्षो से रू-ब-रु हो रहा हूँ.साथियों हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश है यहाँ के मूल में लोकतंत्र की भावना निहित है और छात्रसंघ भी उसी मूल भावना का हिस्सा है और जो लोग छात्रसंघ के खिलाफ है वास्तव में छात्रसंघ के ही नहीं लोकतंत्र के भी खिलाफ है वे उनकी लूट उनके भ्रष्टाचार , छात्रों के शोषण के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबा देना चाहते है ताकि उनकी लूट जारी रहे और उसमे कोई बाधा न पैदा हो लेकिन हम उन्हें उसमे कामयाब नहीं होने देंगे. उन्होंने बहुत चालाकी से छात्रसंघों का द्श्प्रचार किया और उसमे गुंडों का प्रवेश करा कर आम छात्रों नवजवानों को उससे अलग किया ताकि छात्रों- नवजवानों में अपने ही संघ जो उनके हक – हकूक की बात करता है उसके खिलाफ नफरत पैदा हो जाए और वे जब छात्रसंघो को बंद करें तो उनके खिलाफ कोई प्रतिरोधी ताकत खड़ी न हो नतीजा यह हुआ की बेहिसाब फीस बढ़ी और छात्रों उसके बदले आम सुविधाएँ भी नहीं मिली किताबें,पानी , टायलेट आदि का भी कोई इंतज़ाम नहीं है एक तो सरकारे वैसे ही नहीं चाहती की छात्र उच्च शिक्षा ले और लगातार उच्च शिक्षा के बजट में कटौती कर रही है ऊपर से जो बजट आता भी है उसका कोई हिसाब -किताब नहीं है किसी प्रकार का कोई ऑडिट नहीं है उन्होंने पूरे विश्विद्यालय को जर्जर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है छात्र /छात्राओं का शोषण होता है लेकिन आवाज़ नहीं उठा सकते आवाज़ उठाने की जुर्रत करने वाले को धमका कर चुप करा दिया जाता है इसमें जो आवाज उठाने और अपने सम्मान तथा अधिकार के साथ शिक्षा लेने का यदि कोई रास्ता है तो वह छात्रसंघ है.एक स्वाभाविक सी बात है जब शिक्षक संघ है कर्मचारी संघ है प्राचार्य संघ है और वी० सी० के अपने क्लब है तो छात्रसंघ क्यों नहीं सदैव अकेला व्यक्ति कमजोर होता है और संघ एक ताकत. छात्र अकेले रहेगा तो कमजोर रहेगा और छात्रसंघ ही उसकी ताकत है.आम छात्र किसान ,मजदूर के परिवार से गावों तथा छोटे कस्बो से झोला अपने कंधो पर टाँगे आपने भविष्य को बेहतर का बोझ उस झोले में लादे हुए अपनी आँखों में सुनहरे सपने लेकर यहाँ आता है तो उन्हें कोई हक नहीं कि वे उसके सपनो को चकनाचूर कर दें असल में देखा जाए तो वे इसे लूटा जा सकने वाला सामान समझते है और सोचते है की मौका मिला है तो लूटो जोकि अम्बानी -बिड़ला रिपोर्ट में साफ़ -साफ़ दिखाई देता है और मैं  आपको साफ़ बता देना चाहूँगा की इसमें आप सरकारों को अपना मित्र बिलकुल न मानियेगा क्योकि वे बिलकुल भी आपकी हितैषी नहीं है और इसके आप गवाह भी है कि किस तरह खाने और हॉस्टल के सवाल पर जो बिना मांगे ही मिल जाना चाहिए था सरकार ने ऐसी लाठियां चलाई की चमडियाँ ही उधेड़ डाली वो शरीर पर बने घाव के दाग सरकार की आपकी उठने वाली आवाज़ से दुश्मनी का प्रमाण है.

मित्रो जहन में बातें बहुत है जो आने के बाद साझा करने का मौका मिला तो जरूर करूँगा.
आपके संघर्षो के प्रति आपने जज्बातों को प्रेषित करता हुआ.

आपका साथी
ज्योति राय

 

 

# ये ख़त हमें ज्योति राय से प्राप्त हुआ है. इसमें पेश किये गए विचार उनके अपने हैं.

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