महागठबंधन में पड़ी दरार, 80 लोकसभा सीटों पर ये दल लड़ेगा चुनाव…

हेलो दोस्तों ,चुनाव का समय बहुत ही नजदीक है ऐसे में हर पार्टी पूरी तरह से चुनाव जीतने की तैयारी में लगी हुई है. सन 2019, चुनाव की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है ।दोस्तों जहां एक तरफ मोदी को सत्ता से हटाने के लिए सपा और बसपा ने महागठबंधन किया वहीं दूसरी तरफ इस गठबंधन को अपने ही दलों से अब खतरा होने लगा है.
जिस समय सपा और बसपा ने महागठबंधन किया उस समय लोगों को लगा था कि सपा बसपा की जीत पक्की है लेकिन अब जबकि चुनाव इतने करीब आ चुके हैं ऐसे में महागठबंधन के छोटे-छोटे दल इस गठबंधन से नाराज होते नजर आ रहे हैं। यदि ऐसा ही रहा तो इस गठबंधन को भारी नुकसान हो सकता है.

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सूत्रों से पता चला है कि महागठबंधन में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व ना मिलने से उलेमा काफी नाराज है और अब उलेमा काउंसिल छोटे दलों के साथ मिलकर गठबंधन कर के सभी 80 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं दोस्तों खबर यह भी मिली है कि सिर्फ मुस्लिम उलेमा ही नहीं बल्कि पीस पार्टी भी गठबंधन में उचित सीट ना मिलने के कारण गठबंधन से हटने की तैयारी में है.
इस गठबंधन में सपा-बसपा ने यूपी में सिर्फ दो सीटें अन्य दलों के लिए छोड़ी है, आपको यह भी बता दें कि पिछले चुनाव में आजमगढ़ बा आसपास के जिलों में बसपा की जीत के लिए उलेमा काउंसिल ने काफी सहयोग किया था उस समय बसपा से ओलमा कौंसिल ने एक भी सीट नहीं लिया था.
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उलेमा काउंसिल का कहना है कि हमें भरोसा था कि यह गठबंधन हमें कम से कम 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी को उतारने का मौका देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दोस्तों गठबंधन में सपा-बसपा ने यह फैसला किया है कि 38-38 सीटों पर सपा और बसपा चुनाव लड़ेगी और बाकी की 2 सीटें उलेमा काउंसिल को और दो सीटें पीस पार्टी और रालोद को देगी.
उधर पीस पार्टी भी महागठबंधन से इसलिए नाराज है क्योंकि उनके लिए भी सिर्फ एक सीट दी गई है और उस पर भी अखिलेश यादव उन्हें अपने सिंबल पर लड़ाना चाहते हैं ऐसे में पीस पार्टी की नाराजगी जायज है. उलेमा काउंसिल का यह आरोप है कि पार्टी मुसलमानों को अपना हक देने के बजाय उनके द्वारा मिलने वाले वोटों को बस इस्तेमाल कर रही है.

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