24 साल पुराने मस्जिद के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला,अयोध्या केस पर भी पड़ेगा असर

October 9, 2018 by No Comments

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है हाल ही में हिंदूवादी संगठनों ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है कि वह अगले लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर बनवाए नहीं तो उन्हें सत्ता से हाथ धोने पड़ेंगे इसी कड़ी में बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने से जुड़े मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुना दिया है।

बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने पर आया ये फैसला

इस मामले में 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। तीन सदस्यीय विशेष पीठ तय करेगी कि पांच जजों की संविधान पीठ के 1994 के फैसले पर फिर विचार करने की जरूरत है या नहीं। अब खबर सामने आई है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये केस किसी भी बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जायेगा। कोर्ट का कहना है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है और उसके साथ ही यह केस किसी बड़े बेंच को भी नहीं सौंपा जाएगा।

बड़े बेंच को नहीं सौंपा जाएगा केस

मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से 1994 इस्माइल फारूकी केस में यह जजमेंट दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट इस पहलू पर फैसला लेगी कि क्या 1994 के सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच के फैसले को दोबारा देखने के लिए संवैधानिक बेंच भेजा जाए या नहीं।आपको बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि इस फैसले पर दोबारा परीक्षण किए जाने की जरूरत है।

मुस्लिम पक्षकारों ने रखा था ये पक्ष

इससे पहले साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह फैसला सुनाया था कि अयोध्या में स्थित विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा जिसमें से एक हिस्सा रामलला के लिए रहेगा। दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा के लिए रहेगा और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को दिया जाएगा। लेकिन पिछले सुनवाई के दौरान सीनियर वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मांग रखी थी कि साल 1994 के उस फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। जिसमें उन्होंने ये कहा था कि इस्लाम में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की जरूरत नहीं है।

मस्जिद, हमेशा उसी जमीन पर रहेगी

इस बार मुस्लिम पक्षकारों का कहना था कि अब सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगी वह हमें मंजूर होगा लेकिन मस्जिद में तोड़फोड़ की गई मस्जिद में मूर्ति रखी गई। इस मामले में कोर्ट को फेसबुक तो की बुनियाद पर फैसला करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है और इसे तोड़ा गया था। तब भी नमाज जमीन पर बैठ कर की जाती है और वह जगह मस्जिद ही कह लाएगी यह जमीन ना तो किसी को दी जा सकती है और ना ही बेची जा सकती है।

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