राजनीति की माहिर खिलाड़ी हैं मायावती, 2019 में भारी पड़ सकता है भाजपा को “बहन जी” का ये दाँव

March 5, 2018 by No Comments

कल मायावती ने प्रेस से ये तो कहा कि उनकी पार्टी किसी पार्टी से गठबंधन नहीं कर रही है लेकिन सच ये भी है कि बहुजन समाज पार्टी में सालों से चली आ रही दूरियाँ अब कम हो गयी हैं। बसपा सुप्रीमो ने जिस तरह से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन दिया है वो अपने आप में एक बड़ा क़दम है। गोरखपुर और फूलपुर में होने जा रहे लोकसभा उपचुनाव में नतीजे जो ही आएं लेकिन विपक्ष की जीत पहले ही हो गयी है। अब कांग्रेस पर भी ये दबाव है कि वो इन दलों के साथ आ जाये।

मायावती ज़रूर अभी ये ख़बर नहीं फैलाना चाहतीं कि उनका सपा से कोई गठबंधन हुआ है। पर मायावती ने जिस तरह से अप्रत्यक्ष ही रूप से सही सपा का समर्थन किया है वो क़ाबिल ए ग़ौर है।दूसरी तरफ़ सपा भी बसपा को विधानपरिषद के चुनाव में समर्थन देगी। देखा जाए तो जहाँ सपा-बसपा कार्यकर्ता इससे गदगद हैं वहीँ भाजपा कार्यकर्ताओं के होश उड़े हुए हैं. भाजपा के शीर्ष नेता ये जानते हैं कि बसपा और सपा अगर किसी तरह का कोई गठबंधन लोकसभा चुनाव से पहले कर लेते हैं तो उत्तर प्रदेश की ८० सीटों में से भाजपा के खाते में 10 भी आना मुश्किल हो जाएगा. उत्तर प्रदेश ८० सीटों वाला प्रदेश है और यहाँ से भाजपा ने बड़ी संख्या में सीटें हासिल की थीं, अगर 2019 में दुबारा सरकार में आना है तो भाजपा को यहाँ 50 सीटें जीतनी ही होंगी.

सपा और बसपा 2014 के अपने परफॉरमेंस को ठीक करना चाहते हैं और 2017 के विधानसभा चुनाव में हुई हार का बदला लेना चाहते हैं. ऐसे में बसपा-सपा अगर साथ आ जाते हैं तो भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव तो मुश्किल होंगे ही, 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है. बसपा प्रमुख लेकिन राजनीति की माहिर हैं और वो अपने पत्ते धीरे-धीरे ही खोलेंगी.

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