क्या पश्चिमी देशों के एक्शन की वजह से ख़तरे में पड़ जाएगा सऊदी क्राउन प्रिंस का सपना?

November 19, 2018 by No Comments

रियाद: हाल ही में जमाल खाशोग्गी मामले में सऊदी अरब सरकार की तीख़ी आलोचना हुई है. बात सिर्फ़ आलोचना तक सीमित नहीं है, ऐसा माना जा रहा है कि संयुक्त राज्य अमरीका जैसे देश सऊदी अरब की सरकार के ख़िलाफ़ कुछ एक्शन ले सकते हैं. इस मामले में अब सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का नाम भी आ रहा है. कुछ समय पहले ही मुहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब में आधुनिक सोच को आगे बढ़ाने वाला माने जाने लगा था लेकिन अब उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.

इस पूरे मामले से सबसे बड़ा झटका किसी को लगा है तो वो मुहम्मद बिन सलमान और उनके विज़न २०३० को लगा है. एक समय तक तेज़ी से ये प्रोग्राम चल रहा था और सफ़ल लग रहा था लेकिन क्राउन प्रिंस के इस नए मामले में फँस जाने की वजह से विज़न २०३० भी अटक सकता है.आपको बता दें कि क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने आर्थिक विकास के लिए जो पालिसी लागू की है उस पर अब तक बहुत तेज़ी से काम हो रहा है. आर्थिक सुधारों के लिए विज़न २०३० सऊदी सरकार का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है.इस प्रोग्राम के ज़रिये उम्मीद की जा रही है कि सऊदी नागरिकों को जॉब के बेहतर मौक़े प्राप्त होंगे. इसके अलावा इससे नई तकनीक भी देश में जल्दी पहुंचेगी. ऐसा माना जा रहा है कि सरकार चाहती है कि निजीकारन के बाद प्राइवेट सेक्टर जीडीपी को और मदद करे.

जानकारों के मुताबिक़ देश की जीडीपी का अभी 40 प्रतिशत प्राइवेट सेक्टर से आता है, २०३० तक इसे 65 प्रतिशत तक करने की योजना है.ये प्रोग्राम मुख्यता तीन एरिया में काम करेगा. योजनाओं के लिए लीगल फ्रेमवर्क तैयार करना, संस्थागत ढाँचे को बनाना और जो योजनायें बनायी जाएँ उन्हें सही से लागू कराना. गौरतलब है कि सऊदी अरब की सरकार लगातार सऊदी विज़न २०३० पर काम कर रही है. इसमें सामाजिक सुधार और आर्थिक सुधार की बात हो रही है. इसके ज़रिये सऊदी सरकार कोशिश में है कि देश के आर्थिक ढाँचे को और व्यापक बनाया जा सके जिससे कि देश की निर्भरता तेल पर से ख़त्म हो जाए. इसको देखते हुए देश ने कई सारे महिला सुधार भी किये हैं, देश में महिलाओं को ड्राइव करने की इजाज़त नहीं थी लेकिन अब महिलाओं पर से ये रोक हटा ली गयी है, इसके अतिरिक्त भी कई फैसले सऊदी सरकार ने महिलाओं के हक़ में लिए हैं. परन्तु जमाल खाशोग्गी के मामले में सऊदी सरकार की कड़ी आलोचना होने की वजह से अब इसको भी ख़तरा है.ग़ौरतलब है कि २ अक्टूबर को वरिष्ठ पत्रकार जमाल खाशोग्गी इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसुलेट गए थे, उसके बाद से ही वो लापता रहे. बाद में ज्ञात हुआ कि उन्हें सऊदी अधिकारियों ने मौ-त के घाट उतार दिया है.

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