#MeetToSleep: निडर होकर पब्लिक पार्क में जाकर लेटी महिलाएं, Gender Equality का दिया संदेश..

December 17, 2017 by No Comments

नई दिल्ली: साल 2012 में देश की राजधानी में हुए निर्भया रेप और हत्याकांड को 5 साल पूरे हो चुके हैं। इस सन्दर्भ में कल पूरे देश में #MeetToSleep नाम का इवेंट रखा गया। ये कहना बहुत दुखद और शर्म की बात है कि आजादी के इतने साल बाद भी देश की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, आज भी इस समाज में पुरषों और महिलाओं के लिए समानता के अधिकार हैं।

हालांकि सविधान में महिलाओं के अधिकारों की भी बात की गई है। लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि महिलाओं और पुरषों को लेकर सामजिक तानाबाना आज तक सुलझ नहीं पाया है। देश भर में कल हुआ ये इवेंट ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए बनाया गया था। बात करें रोजमर्रा की जिंदगी की तो अक्सर परिवार की महिलाओं पर तरह-तरह की पाबंधियाँ लगाई जाती हैं।

जिनमें से एक है घर से अकेले बाहर नहीं निकलना या देर रात तक बाहर नहीं घूमना। इस पाबंधी के लिए अक्सर लड़कियों को देश में असुरक्षित माहौल की दुहाई दी जाती है। ये इवेंट इसी असुरक्षित माहौल के खिलाफ एक बुलंद आवाज़ की तरह से किया गया। जिसे Blank Noise  नाम के फेसबुक पेज ने #MeetToSleep हैश टैग के साथ शुरू किया।
इसे निर्भया रेप और हत्याकांड के पांच साल पूरे होने पर रखा गया था। जिसमें महिलाओं को किसी पब्लिक पार्क में जाकर सोने के लिए कहा गया। क्यूंकि अक्सर इस तरह का काम करने से महिलायें भयभीत महसूस करती है की उनके साथ छेड़खानी न करे, या फिर इस सोच से ऊपर उठना की समाज क्या सोचेगा।
ये समाज जितना पुरषों के लिए सुरक्षित है, उतना ही महिलाओं के लिए भी होना चाहिए। ये इवेंट इसी कड़ी में एक कोशिश थी महिलाओं के मन से डर को निकाल कर घर से बाहर जा किसी पार्क में सोने की।  ताकि जिन छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना कर उन्हें डराया जाता है, वह उससे बाहर निकल पाएं।
इस हैशटैग में देश भर से महिलाओं से फोटोज पोस्ट किये हैं, जिसमें वह पार्क में बैठे गीत गाती हुई नजर आ रही है और लेटी हुई हैं।
इस सन्दर्भ में फेसबुक पर भारत की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और नारीवादी कमला भसीन ने सन्देश दिया कि बहुत दुखी मन से हम देश की बेटी ज्योति सिंह के साथ अन्य लड़कियों लड़को और महिलाओं के बारे में सोचे, जोकि सार्वजानिक जगहों पर सेक्शुअल हर्रास्मेंट का शिकार हुए हैं।

इस इवेंट में हम किसी भी पब्लिक प्लेस (पार्क) में जाकर बैठेंगे या पढ़ेंगे या फिर लेटेंगे। ताकि हमारे हमारे में मौजूद डर को खत्म कर सकें। हमें देश में ये सन्देश पहुंचाना है कि साल1947 में सिर्फ भारत ही आजाद नहीं हुआ, बल्कि भारती यानी महिलाएं भी आजाद हुई हैं। ये सड़के,रोड, सार्वजानिक जगहे महिलाओं की भी उतनी हैं, जितनी पुरषों के लिए हैं।

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