माँ और बीबी में होता रहता है झ’गड़ा ,फिर शौहर किसका साथ दे ?…हुजुर (स.अ.व.) ने जानिए क्या कहा

दोस्तों आज हम एक ऐसा मसले पर इस्लाम की राय बताने जा रहे है जो इस समय घर घर का मामला है.आज कल लोग घरो में पारिवारिक झग’ड़ो से परेशान है.शादी के बाद से ही कई घरो में मियाँ बीबी के बीच या माँ और बीबी के बीच अनबन होती है कई घरो में मामला सर से ऊपर निकल जाता है.

सास और बहु में होने वाले झग’ड़े में कई बार मामला इतना खराब हो जाता है कि दोनों का साथ रहना मु’श्किल है अब ऐसे में शौहर क्या करे ?
किसका साथ दे शौहर ?-अगर माँ और बीबी दोनों में बहुत ज्यादा ताल्लुकात खराब है फिर शौहर के लिए फैसला करना मुश्किल हो जाता है.

लेकिन अगर इस्लाम की रौशनी में बात की जाये फिर शौहर को बीबी और माँ का जिसकी बात सही हो उसी का साथ देना चाहिए.लेकिन इसका मतलब ये नही आप दोनों में से किसी का साथ छोड़ दे.अख्लाकी दायरे में रहकर माँ और बीबी को दोनों को समझाना चाहिए.

माँ अगर तला’क को कहे-अगर माँ बीबी से बहत नाराज़ हो जाए और तलाक की जिद करे तो शौहर को ऐसी बात को अख्लाकी दायरे में रहकर माँ को मना कर देना चाहिए.हुजुर (स.अ.व.) ने फरमाया कि अल्लाह को तला’क जायज़ चीजों में नापसंद अमल है इससे बचना चाहिए.

अगर बीबी कहे माँ से अलग रहो-अगर बीबी माँ से अलग होकर रहने की जिद करे तो इसको स’ख्ती से मना कर देना चाहिए.बीबी को समझना चाहिए वो ऐसा नही कर सकते है,माँ और बाप का बुढापे में ऐसे नही छोड़ सकते है.इस्लाम ने माँ और बाप के लिए बेटे पर कई फरायज़ बताये.

अगर साथ रहना नामुमकिन है-अगर माँ और बीबी का साथ रहना मुमकिन नही है फिर शौहर को अपनी बीबी के लिए अलग रहने का इन्तेजाम करना चाहिए और माँ और बाप के लिए ऐसा इन्तेजाम करे ताकि उन्हें परेशानी ना हो.शौहर को माँ और बाप के साथ बीबी के फरायज अलग अलग निभाना पड़ेगा.

अगर माँ और बाप दोनों उम्र दराज़ है और बेटा ही उनका सहारा है किसी काम को नही कर सकते फिर आप माँ बाप के खाने बनाने और देख भाल के लिए चाहे खुद करे या फिर किसी नौकर को रखे.

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