मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा रोकने में नाकाम, दे रही है हिंसा को बढ़ावा: वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट

January 19, 2018 by No Comments

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार धार्मिक-अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमले और दूसरी तरह के मानवाधिकार के उल्लंघन में फ़ेल साबित हुई है. ऐसा ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा है. 2018 की विश्व रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा सरकार में हिन्दू-सुप्रीमसी को प्रमोट किया गया है और साथ ही अति-राष्ट्रवाद को भी बढ़ावा दिया गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि और ये सब मौलिक अधिकारों का नुक़सान पहुंचा कर करा जा रहा है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017 में 38 ऐसे मामले हुए जिसमें गाय की रक्षा के नाम पर हमले किये गए लेकिन मुक़दमा उसी के ख़िलाफ़ लिखा गया जिस पर हमला हुआ था. इस तरह के हमलों में 10 लोगों की जान भी गयी है. ह्यूमन राइट्स वाच की साउथ एशिया एडिटर मीनाक्षी गाँगुली कहती हैं कि भारतीय अथॉरिटीज़ ने ये साबित किया है कि वो धार्मिक तौर पर अल्पसंख्यक कम्युनिटी को लगातार हो रहे हमलों से सुरक्षा नहीं देना चाहते. उन्होंने कहा कि इस बारे में संजीदा होकर काम करने की ज़रुरत है तभी भविष्य में ऐसे हमले रुकेंगे.

643 पेज की वर्ल्ड रिपोर्ट में 90 देशों के आंकड़े दिए गए हैं. इसमें कहा गया है कि जबकि अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश के संविधान के हिसाब से व्यक्तिगत प्राइवेसी अंतर्भूत है, लेकिन भारतीय अथॉरिटीज़ एक्टिविस्ट, अकादमिक्स, जौर्नालिस्ट और उन लोगों पर sedition के चार्ज लगा रही है जो सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य सरकारों ने हिंसा को रोकने के लिए और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई बार इन्टरनेट शट-डाउन भी किया है.सिर्फ़ नवम्बर माह में ही 60 इन्टरनेट शट-डाउन हुए हैं जिसमें से 27 जम्मू और कश्मीर में हुए हैं. इसमें कहा गया है कि सरकार ने FCRA के ज़रिये भी NGO को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को रोकने की कोशिश की है जिससे के एक्टिविस्ट और ह्यूमन राइट्स का बचाव करने वालों को परेशान किया जा सके.
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