GST लागू करने के बाद बढ़ गयी हैं मोदी सरकार की मुश्किलें; लेना पड़ेगा क़र्ज़?

December 29, 2017 by No Comments

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना उनके विरोधी तो करते ही रहते हैं लेकिन कुछ जानकार भी मोदी सरकार की नीतियों को ग़लत बताते हैं. जिन दो नीतियों का बार-बार ज़िक्र होता है उनमें एक है “नोटबंदी” और दूसरी GST. GST को लेकर इसके लागू करने के तरीक़ों पर भी अधिक सवाल उठते हैं. असल में मोदी सरकार ने कमाई को ज़्यादा करने के लिहाज़ से जल्दी जल्दी में GST को लागू कर दिया जिसके बाद इससे लोगों को परेशानी भी हुई और इसका विरोध भी हुआ लेकिन मीडिया में आयी ख़बरों की मानें तो अब सरकार का वही दाँव उल्टा पड़ता जा रहा है जिस दाँव पर सरकार के मंत्री ख़ुश थे.

एक फ़ाइनेंसियल ख़बरों के पोर्टल पर छपी ख़बर के मुताबिक़ GST कलेक्शन में कमी होने की वजह से सरकार की चिंता बढ़ी हुई है. अब हालात से निबटने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के जनवरी-मार्च क्वार्टर में सरकार ने 93 हज़ार करोड़ रूपये जुटाने की योजना बनायी है जो पूर्व की योजना से 43 हज़ार करोड़ अधिक है. इसका अर्थ ये है कि सरकार क़र्ज़ अधिक लेने जा रही है.

समझने की बात ये भी है कि ग्लोबल एजेंसियाँ फ़िस्कल डेफ़िसिट के आधार पर ही किसी देश को रेटिंग देती हैं और जिसका डेफ़िसिट कम होता है उसे अच्छी रेटिंग मिलती है. अब भारत को भी इसीलिए अच्छी रेटिंग मिली थी क्यूंकि देश ने फ़िस्कल डेफ़िसिट कम करने का टारगेट पूरा किया था लेकिन अब राजस्व के कम होने से ऐसा लग रहा है कि सरकार लक्ष्य से चूक जायेगी. ऐसा होता है तो सरकार की दुनिया भर में फ़ज़ीहत भी हो सकती है.

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