मध्य प्रदेश में भाजपा को झंडा थामने वाले भी नहीं मिल पा रहे..

October 25, 2018 by No Comments

भोपाल: मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. इन चुनावों में देखा जाए तो भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुक़ाबला है. जहाँ भाजपा इस कोशिश में है कि वो ये चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर लड़े वहीं कांग्रेस इस चुनाव को लोकसभा चुनाव का सेमी-फाइनल मान रही है. देखा जाए तो दोनों ही पार्टियाँ अपनी अपनी परेशानी से जूझ रही हैं.

कांग्रेस के साथ सबसे बड़ी समस्या है कि उसके पास ज़रूरत से ज़्यादा नेता हैं जो अलग-अलग गुट बना कर बैठे हैं. पार्टी की अंदरूनी सियासत ही पार्टी को नुक़सान करने में लगी है. भाजपा की मुश्किल ये है कि भाजपा से किसान वोट नाराज़ हो गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विकास के दावे भी अब जनता के समझ नहीं आ रहे हैं. ख़बर तो यहाँ तक फैली है कि शिवराज की रैली में झंडा उठाने वाले लोग नहीं मिल पा रहे हैं.

जनआशीर्वाद यात्रा के ज़रीये शिवराज ने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश तो की है लेकिन उन्हें बहुत अच्छा रेस्पोंस नहीं मिल पा रहा है. भाजपा की अब पूरी रणनीति इस बात पर है कि कांग्रेस में अंतर्कलह कितनी हो पाती है. भाजपा भी हालाँकि अपना कुनबा एक नहीं कर पा रही है. पार्टी के अन्दर कुछ नेता नाराज़ चल रहे हैं. फिर भी शिवराज सिंह चौहान प्रभावी हैं. दूसरी ओर कांग्रेस में कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह का बड़ा कुनबा है.

फ़िलहाल ये दावा किया जा रहा है कि पार्टी के अंदर कोई मतभेद नहीं हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी लगातार सभाएँ कर रहे हैं. इन सभाओं में बहुत अच्छी भीड़ नज़र आ रही है. जो भीड़ कांग्रेस की रैली में नज़र आती है वो उत्साहित भी नज़र आती है. कांग्रेस जिस हिसाब से आगे बढ़ रही है वो चुनाव तक अपने पक्ष में माहौल खड़ा कर सकती है, उसकी मुश्किल बस अंदरूनी मतभेद ही नज़र आते हैं, दूरी ओर भाजपा की मुश्किल ये है कि उसके पास अब लोग ही नहीं नज़र आ रहे हैं. भाजपा के बड़े नेता भी रैली में जाने से बच रहे हैं.यही वजह है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है.

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