आंतरिक कलह से परेशान भाजपा ने 53 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया

November 15, 2018 by No Comments

भोपाल: लोकसभा 2019 के पहले कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है जिसमें से मध्यप्रदेश भी एक है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश भर में जन आशीर्वाद यात्रा कर रहे हैं तो वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी सत्ता विरोधी लहर पर सवार होने के लिए पूरी तरीके से तैयारी में जुट चुकी है।वहीं कांग्रेस भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में चौका लगाने से रोकने के लिए जोरदार फील्डिंग कर रही है।मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नामवापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी पार्टी लाइन को नहीं मानने वाले भाजपा बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित 53 नेताओं को पार्टी प्रदेश संगठन ने छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया।वही लगभग एक दर्जन नेताओं ने नाम वापस ले लिया, लेकिन पांच दर्जन नेता नहीं माने।

बुधवार देर रात प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की मौजूदगी में हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में बगावती तेवर दिखाने वाले ऐसे सभी नेताओं को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया। आपको बीते दे कि,निष्काषित नेताओं में मुख्य रूप से दमोह और पथरिया से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डटे रहने वाले पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, गुना जिले के बामोरा से पूर्व मंत्री के एल अग्रवाल शामिल हैं।वही राज्य में सभी 230 सीटों के लिए नामांकनपत्र दाखिले का कार्य 02 नवंबर को शुरू हुआ था और नौ नवंबर तक 4157 प्रत्याशियों की ओर से नामांकनपत्र दाखिल किए गए। नाम वापसी के अंतिम दिन बुधवार को 556 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए और अब लगभग 2900 प्रत्याशी मैदान में हैं। 

पार्टी से निष्कासित बागी नेताओं में सरताज सिंह, रामकृष्ण कुष्मारिया, नरेंद्र कुशवाह, समीक्षा गुप्ता, लता मस्की, धीरज पटेरिया, राजकुमार यादव के नाम शामिल हैं। और आपको यह भी बता दे की,कुछ दिन पहले ही सरताज सिंह कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस ज्‍वाइन करने के घंटे भर बाद ही पार्टी ने उन्‍हें होशंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बना दिया। मध्यप्रदेश में भाजपा लगातार चौथी बार सरकार बनाने की कोशिश में है, तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में फिर से सत्ता हासिल करने के प्रयास में जुटी है। इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि लगातार चौथी बार अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा कितने बड़े स्तर पर और कितनी रणनीतियों के साथ चुनावी तैयारियों में जुटी हुई होगी, निश्चित ही विपक्ष भी इस सोच में जरूर है कि इस बार वह सत्तारूढ़ पार्टी को सत्ता से हटाकर विपक्ष में बैठाया जाए।

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