'मु'स्लिमों को पाक भेजो' की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया वो जिससे हिले नफ़'रत करने वाले…

March 16, 2019 by No Comments

साउथ 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद मो’दी सरकार के राज में देश में रहने वाले मु’सलमानों की हालत कैसी हो चुकी है।इसका ब्योरा देने की जरूरत नहीं है।खासतौर पर बी’जेपी शासित राज्यों में मुसलमानों के साथ ब’दसलूकी के मामले हद पार कर चुके हैं।हिं’दूवादी सं’गठन मु;सलमानों से उनके देशभक्त होने का सबूत मांगते रहते हैं।हर तरफ मुसलमानों को श’क की निगाह से देखा जा रहा है।
छोटी-छोटी बात पर मु’सलमानों को पाकिस्तानी करार दिया जाता है और यह कहा जाता है कि उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाए।इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।जिसमें भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की मांग की गई थी।इस याचिका पर जस्टिस रोहिंटन नरीमन और विनीत सरन की पीठ ने सुनवाई की है।लेकिन इसकी सुनवाई के दौरान ऐसी घटना घटी जोकि हैरानी जनक थी।


सुप्रीम कोर्ट


दरअसल बॉलीवुड फिल्म जौली एलएलबी में जिस तरह से कोर्ट के जज ने वकीलों को लताड़ लगाई थी बिल्कुल ऐसा ही इस याचिका की सुनवाई के दौरान हुआ।बीते साल दिसंबर में मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस एसआर सेन ने कहा था कि “भारत विभाजन के बाद हिंदू देश बनना चाहिए था”. सेन ने यह टिप्पणी एक शख्स द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए की थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा अधिवास प्रमाण पत्र से वंचित कर दिया गया था।
आपको बता दें कि फरवरी में,चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने मेघालय हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को एक याचिका पर नोटिस जारी कर इसे खत्म करने की मांग की गई थी।इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा: “क्या आप गंभीरता से इस पर बहस करना चाहते हैं? हम आपको सुनाएंगे, लेकिन हम आपके खिलाफ सख्ती से पास करेंगे।


मुस्लिम


जब याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका पर बहस करने से इनकार कर दिया, तो सुप्रीम अदालत ने याचिका खारिज कर दी।गौरलतब है कि इस केस में इससे अच्छा फैसला और कोई नहीं हो सकता था। देश की न्याय प्रणाली को ऐसी फालतू की पिटीशनों पर ऐसा ही रुख अपनाना चाहिए।

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