नबी ऐ पाक(स.अ.व.) खाने में ये चीज़ खाते थे…इस गिज़ा को खाने से….

March 31, 2019 by No Comments

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को खाने में कुछ चीज़ें बहुत ज़्यादा पसंद थीं,यह चीज़ें जब आप के सामेन आती थीं तो आप बहुत शौक से खाते,लेकिन इन के इलावा कभी दूसरी चीज़ भी आती तो आप खाते थे,अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी खाने में कमी नहीं निकाली।
सिरका और जो की रोटी-अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को सिरका और जो की रोटी बहुत पसंद थी।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम अक्सर इन दोनों का इस्तिमाल फ़रमाते। गोश्त कद्दू और जो की रोटी को पसंद फ़रमाते और बड़ी रग़बत से तनावुल फ़रमाते।

PROPHET MUHAMMAD


ज़ैतून और इस का तेल-हज़रत अब्बू रशीद अंसारी रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि तुम ज़ैतून का फल खाओ और इस का तेल इस्तिमाल करो क्योंकि ये बाबरकत दरख़्त है।

सरीद-सरीद इस खाने को कहा जाता है जो शोरबे या पतली दाल में भिगो कर तैयार किया जाता है।हज़रत अबदुल्लाह बिन अब्बास रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम का महबूब तरीन खाना सरीद था।
कद्दू-कद्दू एक सब्ज़ी है जो ज़ायक़ा में लज़ीज़ और तासीर में ज़ूद-हज़्म सेहत,बख़श और दिमाग़ी सलाहीयतों को बढ़ाने वाला है।कद्दू मुफ़र्रेह क़लब, जिगर और आसाब के लिए मुफ़ीद सब्ज़ी है।कद्दू अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को बहुत ज़्यादा पसंद था।पसंदीदगी का ये आलम था कि गोश्त और कद्दू के सालन से कद्दू के क़त्ले उठा उठा कर पहले खाते थे।
हज़रत अनस रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत है कि एक दर्ज़ी ने अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को खाने पर बुलाया,में आप सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ था।साहिब ख़ाना ने जो की रोटी और शोरबा पेश किया। शोरबा में कद्दू गोश्त था।मैंने देखा कि अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम कद्दू के टुकड़े उठा उठा कर निकालते थे। इस दिन से में भी कद्दू को पसंद करने लगा।

शहद-शहद के बारे में ये बात तय-शुदा है कि ये बहुत से अमराज़ में मुफ़ीद है।और इस का इस्तिमाल जिस्म को अमराज़ से महफ़ूज़ रखता है।तमाम-तर काविशों के बावजूद अब तक शहद का मुतबादिल तलाश नहीं किया जा सका।शहद की एक ख़ूबी उस के रस का जल्द असर करना और क़ुदरती Anti Biotic होना है। ये हलक़ से नीचे उतरते ही ख़ून में शामिल हो जाता है।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को शहद बहुत पसंद था।और इस का बहुत इस्तिमाल फ़रमाते थे।
दूध-दूध इन्सान के लिए एक मुकम्मल ग़िज़ा है और इस से बेहतर ग़िज़ा शायद ही हो।दूध में जिस्म की ज़रूरत के मुताबिक़ तमाम अजज़ा मौजूद हैं जिनसे जिस्म सेहत मंदिरा सकता है और इस की नशो नुमा सही हो सकती है।जिन इलाक़ों के लोग दूध इस्तिमाल करते हैं उनकी उमरें ज़्यादा होती हैं।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को दूध बहुत पसंद था।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम अक्सर गाय और बकरी का दूध इस्तिमाल फ़रमाते।

खजूर-खजूर एक मुक़व्वी ग़िज़ा है।सब फलों में से ज़्यादा तवानाई बख़श है।जिस्म इन्सानी को जिस क़दर हयातीन की ज़रूरत होती है उसी क़दर खजूर में है। खजूर जिस्म को फ़र्बा करती है।सालिह ख़ून पैदा करती है।सेना और फेफड़ों को क़ुव्वत बख़शने के लिए इस से बेहतर कोई चीज़ नहीं है।खजूर अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम की मर्ग़ूब ग़िज़ा रही है।
क़ुरआन-ए-मजीद में भी खजूर का ज़िक्र आया है। खजूर की एक किस्म अजवा है जो मदीना मुनव्वरा में होती है।ये अमरज़-ए-क़लब में मुफ़ीद है।अजवा खजूर अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम को बहुत पसंद थी।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है जो शख़्स रोज़ाना सुबह के वक़्त सात अजवा खजूरें खा लिया करे उसे उस दिन ज़हर और जादू से कोई नुक़्सान नहीं पहुंचा सकता।एक और जगह इरशाद है अजवा जन्नत का फल है।इस में ज़हर से शिफ़ा देने की तासीर है।
गोश्त-गोश्त जिस्म इन्सानी की सेहत-ओ-तवानाई के लिए बहुत मुफ़ीद क़रार दिया जाता है। इस में जिस्म की ताक़त-ओ-तवानाई के लिए अहम अजज़ा होते हैं। अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम हलाल जानवरों का गोश्त बहुत शौक़ से खाते थे। बल्कि गोश्त अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम की मर्ग़ूब ग़िज़ा थी। मुर्ग़ का गोश्त भी अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम पसंद फ़रमाते। इसके इलावा दूसरे हलाल जानवर के गोश्त अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम शौक से खाया करते थे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *