नबी(स.अ.व.) की इस दुआ को पढ़कर बी'मारी का करे इलाज़,सेहतमंद होने के लिए…

February 24, 2019 by No Comments

दुनिया में पुर सुकून एवं तमाम बी’मारियों से छुटकारा पाने के लिए तमाम दवा’ओ के इस्तेमाल करने के साथ रूहानी काम भी करते है.इस्लाम धर्म में सेहतमंदी के लिए तमाम निर्देश है और कुरान के पाक कलाम से कई सारी बी’मारियों का इलाज है लेकिन इलाज़ के लिए कुरान पर पूर्व विश्वास होना चाहिए.आज हम ऐसी तमाम दुआओं के उल्लेख करने जा रहे है जिससे आप तिब्बी फायदा ले सकते है.
अल्लाह ताला ने क़ुरआन पाक में इरशाद फ़रमाया है…یٰأَیُّھَاالنَّاسُ قَدْ جَائَ تْکُمْ مَّوْعِظَۃٌ مِّنْ رَّبِّکُمْ وَشِفَائ’‘ لِّمَا فِیْ الصُّدُورِ (یونس57)…..लोगो! जो ईमान लाए हो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से एक नसीहत और दलों की बीमारीयों की लिए शिफ़ा आगई है।

कुरान


दूसरी जगह इरशाद है…وَنُنَزِّلُ مِنَ الْقُرْآنِ مَا ھُوَ شِفَائ’‘ وَّرَحْمَۃٌ لِّلْمُؤْمِنِیْنَ وَلاَ یَزِیْدُ الظَّالِمِیْنَ إِلاَّ خَسَارًاO (بنی اسرائیل82)
और हम क़ुरआन में जो कुछ नाज़िल करते हैं वो मोमिनों के लिए शिफ़ा-ए-है मगर ज़ालिमों के लिए ये क़ुरआन ख़सारे के इलावा किसी चीज़ में इज़ाफ़ा नहीं करता।
तीसरी जगह इरशाद है….قُلْ ھُوَ لِلَّذِیْنَ اٰمَنُوْا ھُدًی وَّشِفَاء ……कह दीजिए,ये क़ुरआन ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और शिफ़ा है।(हां मीम अलसजदा ४४)
क़ुरआन मजीद को मुतलक़ शिफ़ा इरशाद फ़रमाया गया है जिसका मतलब ये है कि क़ुरआन-ए-मजीद जिस्मानी बीमारीयों के लिए भी शिफ़ा है।बहुत सी अहादीस भी इस की तसदीक़ करती हैं। हम जिस्मानी बीमारीयों के लिए शिफ़ा का ज़िक्र करेंगे।हम यहां सिर्फ ऐसे अमराज़ का ज़िक्र करेंगे जिनका ईलाज अहादीस सही से साबित है।

पवित्र कुरान


दिल के अमराज़ का ईलाज…..दिल के मुख़्तलिफ़ अमराज़ मसला दिल का तेज़ धड़कना (इख़तिलाज क़्लब), पज़मुर्दगी और इज़तिराब क़लब दूर करने के लिए क़ुरआन-ए-मजीद की बकसरत तिलावत करनी चाहीए। इरशाद है اَلَا بِذِکْرِ اللّٰہِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوْب आगाह रहो कि दलों का इतमीनान अल्लाह के ज़िक्र से है। (अलराद28) नीज़ आपका इरशाद मुबारक है क़ुरआन-ए-मजीद पढ़ने वालों पर अल्लाह तआला का सकीना नाज़िल होती है।(मुस्लिम)….लिहाज़ा क़ुरआन-ए-मजीद की बकसरत तिलावत दिल की तमाम बीमारीयों के लिए सेहत बख़श है।
ज़हरीले जानवर के काटे का ईलाज
ज़हरीले जानवरों के काटने की सूरत में सूरा फ़ातिहा पढ़ कर दम करना चाहीए। (बुख़ारी) नीज़ सूरा अलकाफ़रोन और मऊज़ तीन पढ़ कर दम करना चाहीए। आपने बिच्छू के काटने पर इस जगह को नमक मिले पानी से धोया और सूरा अलकाफ़रोन और मऊज़ तीन पढ़ कर उस वक़्त तक दम फ़रमाते रहे जब तक आराम नहीं आया। (तबरानी)

मदीना


जुनून,मिर्गी और साया वग़ैरा….जुनून और मिर्गी की बीमारी में रोज़ाना सुबह-ओ-शाम तीन तीन बारह सूरा फ़ातिहा पढ़ कर दम करना चाहीए।(अब्बू दाऊद)
तमाम बीमारीयों का ईलाज.…तमाम बीमारीयों में सूरा फ़ातिहा का दम बकसरत करना चाहीए।आपका इरशाद मुबारक है सूरा फ़ातिहा पढ़ कर जो चीज़ अल्लाह तआला से तलब की जाये अल्लाह तआला इसे अता फ़रमाते हैं। (मुस्लिम)…….सुबह-ओ-शाम तीन तीन मर्तबा सूरा अलाख़लास और मऊज़ तीन पढ़ कर दम करना चाहीए।(अब्बू दाऊद)
जांकनी की तकलीफ़ का ईलाज-मरज़ुल-मौत में मरीज़ की इयादत करने वालों को मऊज़ तीन पढ़ कर मरीज़ पर दम करना चाहीए। रसूल अकरम के मरज़ुल-मौत में सय्यदा आईशा ने मऊज़ तीन बार पढ़ कर आपको दम करती रहीं। (बुख़ारी)
नज़र बद से बचने का ईलाज-नज़र बद से बचने के लिए मऊज़ तीन पढ़ कर मरीज़ को दम करना चाहीए। सय्यदना अब्बू सईद कहते हैं रसूल अल्लाह सल्ल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी बाअज़ दुआ में शयातीन जिन-ओ-अनस से अल्लाह तआला की पनाह तलब फ़रमाया करते थे, लेकिन जब मऊज़ नाज़िल हुई तो आपने बाक़ी दुआएं तर्क फ़र्मा दें और मऊज़ को अपना मामूल बना लिया। (तिरमिज़ी)
आपका इरशाद मुबारक है पनाह मांगने की दाओं में से सबसे बेहतर दुआएं मऊज़ हैं। (अब्बू दाऊद)

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