सुहागरात में नबी(स.अ.व.) की इस सुन्नत को मियां बीबी ज़रूर करे,शै'तान कभी..

February 28, 2019 by No Comments

मस्नून निकाह के बाद शौहर को चाहीए कि अपनी नई-नवेली दुल्हन के साथ अच्छे से पेश आए,उस का दुख-दर्द और ग़म कम करने और इस का दिल बहलाने के लिए इस से लुतफ़ की बातें करे,दिल-लगी और हंसाने वाले कलिमात कहे,उसे तोहफ़ा तहाइफ़ देकर इस से अपनी मुहब्बत और लगाओ का इज़हार करे,खाने पीने की उम्दा चीज़ें पेश करीए,दूध हो तो बहुत बेहतर है,शौहर पहले ख़ुद कुछ पीए या खाए फिर दुल्हन को पिलाए.दुल्हन जब फ़ारिग़ हो जाएगी तो वो बर्तन दूल्हे को पीने के लिए दे दे,यही नबी सल्लाहू अल्लाह अलैहि वसल्लम की सुन्नत है।
जैसा कि नबी सल्लाहू अल्लाह अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जब तुम किसी औरत से शादी करो या कोई ग़ुलाम ख़रीदो,(या कोई जानवर ख़िरव दो) तो इस की पेशानी पर हाथ रखकर बिसमिल्लाह कहते हुए बरकत की दुआ करे.ए अल्लाह में इस की भलाई तलब करता हूँ और जिस पर तो ने उसे पैदा किया है इस की भलाई का सवाल करता हूँ,और तेरी पनाह मांगता हूँ उस के शर से और इस चीज़ के शर से जिस पर तो ने उसे पैदा किया है। (अबी दाऊद :2160 सुंन इबन माजा:1839)

अब अगर दोनों में से कोई हमबिस्तर होने की ख़ाहिश रखता हो तो याद रहे कि दुल्हन शब ज़फ़ाफ़ (सुहाग-रात) को लेकर दूसरों से बे-बुनियाद बातें सुनकर बहुत डरी हुई होती है,हालाँकि उस की हक़ीक़त ज़हनी अपझ से ज़्यादा कुछ नहीं होती है,हर दुल्हन को अपने ज़हन से बे-बुनियाद अफ़्वाह को निकाल कर अपने दिल में मौजूद डर को निकाल देना चाहीए।क्योंकि शादी से इन्सान बहुत सारी बुराईयों से बच जाता है,उसी लिए शैतान शादीशुदा जोड़े से बहुत जलन रखता है।.
जब हमबिस्तर होने का इरादा हो तो दुल्हन को मुक़द्दमात जिमा (हम-बिस्तर होने से पहले वाले उमूर जैसे बोस वकनार और बग़लगीर होना वग़ैरा) के ज़रीया ज़हनी तौर पर तैयार करले,इस तरह वो मामूली तकलीफ़ के एहसास के साथ ज़िंदगी की सबसे बेहतरीन ख़ुशी महसूस करेगी।लेकिन अगर सुहाग रात में शौहर बीवी हमबिस्तर न हो पाएँ तो कोई हर्ज नहीं है,आज कल लोगों में मशहूर है कि अगर सुहाग रात में हमबिस्तर नहीं हुये तो वलीमा नहीं है,यह पूरी तरह गलत है,इस बात में कोई सच्चाई नहीं है।

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