#SaveGirlChild: लेकिन जमीनी हक़ीकत यह है कि लोग बेटी को पैदा ही नहीं होने देते..

January 24, 2018 by No Comments

नई दिल्ली: देश में आज के दिन राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। ये दिवस हम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नारी शक्ति के रूप में उभरने पर मनाते हैं। लेकिन इसे मनाने के पीछे सिर्फ यही वजह नहीं है। भारत जैसे देश में आज भी लड़कियों और महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है।

देश के कई राज्यों में आज भी भ्रूण हत्या, दहेज़ के नाम पर महिलाओं की हत्या, शिक्षा के शिक्षा का अधिकार नहीं दिया जाता, महिला अपराध हो रहा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस,देश में लड़कियों के साथ हो रहे भेदभाव, चाहे वो उनके खान-पान से संबंधित हो या फिर पढ़ाई-लिखाई व आगे बढ़ने के अवसरों से संबंधित हो, उसके प्रति लोगों को जगाने व बेटियों को समान अवसर दिलाने की कोशिश में यह मनाया जाता है।

इस मौके पर जेंडर इक्वलिटी के मुद्दे को उठाने की जरूरत है, ताकि समाज द्वारा बनाये गए बेटे और बेटी के बीच के फ़र्क़ को मिटाया जा सके। घरों और समाज में बेटियों को भी वही प्यार और सम्मान मिल सके। बेटी के जन्म पर भी वही ख़ुशी मनाई जाए, जिसकी वो हक़दार हैं।
हालांकि आज देश में लड़कियों के हित में कई तरह के अभियान चलाये जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हक़ीकत यह है कि लोग अपने बेटी, को पैदा ही नहीं होने देते।
नेशनल गर्ल चाइल्ड डे, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के पहली बार पीएम की कुर्सी पर बैठने के दिन मनाया जाता है। #SaveGirlChild और कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराईओं को इस समाज से खत्म करना और लड़कियों को समान अधिकार देना यही इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है। इस दिवस पर लड़कियों को आगे बढ़ाने के बारे में जागरूक किया जाता है।

इसके लिए टीवी, सोशल मीडिया के ज़रिए या फिर प्रशासनिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रोग्राम किये जाते हैं। सोशल मीडिया पर आज बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी है तो कल है जैसे मुद्दे पर बात की जा रही हैं।

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