National Youth Day: भारतीय राजनीति को नई दिशा में ले जा रहे हैं ये युवा नेता..

January 12, 2018 by No Comments

कन्हैया कुमार: कन्हैया कुमार अखिल भारतीय छात्र परिषद (AISF), जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्टूडैंट विंग है, के नेता हैं। वह 2015 में जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बैगुसराय जिले के एक गांव में हुआ। जोकि आज दुनियाभर में एक वामपंथी छात्रनेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। देशभर में कन्हैया कुमार को एक बेहतरीन वक्त के रूप में देखा जाता है और वह राजनीति में भी काफी सक्रिय है। कन्हैया को अपने भाषणों में दक्षिणपंथी संगत आरएसएस का विरोध करते हुए देखा जा सकता है। के दोस्त और अन्य लोग उन्हें बेहतरीन वक्ता कहते हैं। उनके चुनाव के एक दिन पहले दी गई उनकी स्पीच उनके चुनाव जीतने का कारण मानी जाती है। कन्हैया कुमार की हालही में एक किताब छपी है जिसका नाम बिहार टू तिहार है।

जिग्नेश मेवानी: जिग्नेश मेवाणी गुजरात, भारत एक राजनीतिज्ञ है। वह वडगाम निर्वाचन क्षेत्र में गुजरात विधान सभा के सदस्य है। उन्होंने एक सामाजिक कार्यकर्ता और वकील के रूप में काम किया है। उन्होंने 2016 में गुजरात में भारतीय जाति वर्गीकरण में ‘नीच जातियों’ के रूप में माने जाते दलितों के विरोध का नेतृत्व किया था। हाल ही में जिग्नेश ने युवा हुंकार रैली में जातिवाद के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए एक नया कैंपेन शुरू किया है।

हार्दिक पटेल: हार्दिक पटेल गुजरात में पटेल समुदाय द्वारा ओबीसी दर्जे की मांग को लेकर जारी आरक्षण आंदोलन के युवा नेता हैं। जिन्होंने गुजरात सरकार के खिलाफ ओबीसी दर्जे में पटेल समुदाय को जोड़कर सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण देने का आंदोलन चलाया। संगठन ने स्वयं को एक गैर राजनीतिक संगठन करार दिया है।

भारत में कुछ जातियों को अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) में सम्मलित करना एक सकारात्मक कदम है जो शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षित कोटा प्रदान करता है। गुजरात में 27% सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14% अनुसूचित जनजाति के लिए व 7% अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के फैसले में आरक्षण को 50% तक सीमित रखा है।

उमर खालिद: हाल ही में तेजी से लोकप्रिय हो रहे जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद की जोड़ी के बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि ये दोनों देश की राजनीति में दलित-मुस्लिम गठजोड़ को एक नया चेहरा देने की कोशिश कर रहे हैं।

अल्पेश ठाकोर: अल्पेश ठाकोर गुजरात में सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। वह गुजरात में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के नेता हैं। अल्पेश ने पाटीदारों को आरक्षण दिए जाने की मांग का विरोध किया था। उन्होंने गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना की स्थापना की ताकि इस समुदाय को शराब की लत जैसी समस्याओं से दूर किया जा सके। उन्होंने ओबीसी, एससी, एसटी एकता मंच का गठन किया जिससे इन समुदायों के लोगों को उचित आरक्षण की मांग का एक सामाजिक प्लेटफॉर्म मिले। जिनके नेतृत्व में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के कुछ बाद प्रदर्शन हुआ।

अखिलेश यादव: एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पूर्व वे लगातार तीन बार सांसद भी रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश ने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया। मार्च 2012 के विधान सभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर मात्र 38 वर्ष की आयु में ही वे उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्यमन्त्री बने थे। इस वक़्त उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है लेकिन अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी को और मजबूत करने में लगे हुए हैं।

राहुल गाँधी: हाल ही में सर्वसम्मति से राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बना दिया गया है। बीते साल में हुए उत्तर प्रदेश और गुजरात विधानसभा में किए गठबंधन के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में उनका कद बढ़ा है। युवाओं में राहुल गाँधी का प्रभाव तेज रफ्तार से बढ़ रहा है।

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