“नेपाल भारत से पेट्रोल ख़रीदता है और वहाँ पेट्रोल भारत से सस्ता है!”

पेट्रोल की क़ीमतों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है और इस बात को लेकर आम लोगों में बहुत रोष है. अब सरकार को इस ग़ुस्से को समझ कर पेट्रोल के दाम कम करने की कोशिश करनी थी लेकिन केन्द्रीय सरकार में पर्यटन राज्य मंत्री केजे अलफोंस ने जनता को ही डाँटते वाले अंदाज़ में कहा है कि पेट्रोल-डीजल ख़रीदने वाले भूके नहीं मर रहे हैं.
त्रिवेंद्रम में पत्रकारों को दिए गए इस बयान से ज़ाहिर है कि केन्द्रीय मंत्री को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की कोई चिंता नहीं है. बल्कि वो तो उसे ठीक ही मान रहे हैं.

पेट्रो पदार्थों के महंगा होने की एक बड़ी वजह एक्साइज ड्यूटी का बढ़ा हुआ होना है. सबसे मज़े की बात तो ये है कि भारतीय कंपनी ‘इंडियन आयल’नेपाल को पेट्रोल सप्लाई करती है और इस लिहाज़ से नेपाल में पेट्रोल महंगा होना चाहिए था. परन्तु वहाँ पेट्रोल भारत से सस्ता है. इसका अर्थ यही है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर भरपूर टैक्स लगाया है.सोशल मीडिया पर अब नेपाल का उदाहरण ख़ूब चल पड़ा है.

अब जबकि अन्तराष्ट्रीय बाज़ारों में तेल की क़ीमतें काफ़ी कम हैं तो पेट्रोल की क़ीमतें तो काफ़ी कम होनी चाहिए थीं लेकिन पेट्रोल इस वक़्त 80 रूपये तक पहुँच गया है.

सोशल मीडिया में भी इस बात को लेकर ख़ूब चर्चा है. नरेन्द्र मोदी, अनुपम खेर, स्मृति ईरानी और कई दूसरे नेताओं के उस वक़्त के ट्वीट वायरल हो रहे हैं जो उन्होंने तब किये थे जब मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे. उस दौर में ये सभी लोग पेट्रोल की बढ़ी हुई क़ीमतों के लिए UPA सरकार को दोषी दे रहे थे जबकि विश्व बाज़ार में पेट्रोल की क़ीमतें ज़्यादा थीं. अब ये लोग इस बात पर कोई भी कमेंट करने से बच रहे हैं.

समझने की बात ये है कि अगर पेट्रोल-डीजल की क़ीमतें बढ़ गयी हैं तो पहले से ही बढ़ चुकी महँगाई और भी बढ़ेगी, ये कोई राकेट साइंस तो है नहीं.. सीधी सी बात है. परन्तु सरकार के मंत्रियों को शायद इस बात की कोई चिंता ही नहीं है.

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