निर्भया की माँ ने किया राहुल गाँधी का शुक्रिया-‘उनकी बदौलत बेटा बना पायलट’

November 3, 2017 by No Comments

नई दिल्ली: साल 2012 में हुए निर्भया कांड ने पूरे भारत को झंझोड़ कर रख दिया था। आज भी इस परिवार के दिल पर क्या गुजरती होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। बेटी का डॉक्टर बनने का सपना तो पूरा नहीं हो पाया लेकिन अब परिवार के बेटा अपना पायलट बनने के सपने को पूरा कर पाने में सफल हो गया है।

निर्भया की मां ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि निर्भया के जाने के बाद हम सब टूट गए थे। इस दौरान कई लोग हमारी मदद के लिए सामने आये। जिसमें से एक थे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी। उन्होंने हमारे परिवार की बहुत मदद की। आज उनकी बदौलत ही मेरा बेटा पायलट है। बेटे को पायलट बनाने का हमारा सपना उन्ही की बदौलत पूरा हो पाया है। इसके लिए हम राहुल गांधी का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं।

निर्भया की मां ने बताया कि राहुल ने लगातार उसे सलाह दी और अपने लक्ष्य का पीछा करने को कहा। सुनील(बदला हुआ नाम) तो आर्मी में जाना चाहता था। लेकिन राहुल गांधी ने उसे पायलट बनने का सपना दिखाया। उन्होंने कहा था कि 12वीं की पढाई को पूरा करके तुम पायलट की ट्रेनिंग करना। जब निर्भया के साथ वह भीषण हादसा हुआ था, उस दौरान उसका भाई 12वीं क्लास में ही था। साल 2013 में सीबीएसई की परिक्षा पास करने के बाद उसे रायबरेली की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में एडमिशन मिल गया।

राहुल ने उसके कॉलेज की पूरी पढ़ाई को स्पॉन्सर तो किया ही, बल्कि इसके साथ राहुल वक़्त के अनुसार फोन कर उसे पायलट बनने के लिए प्रेरित भी करते थे। उन्होंने बताया कि सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं कई बार प्रियंका गांधी ने भी फोन करके सुनील और परिवार का हालचाल पूछती थी।
निर्भया का सबसे छोटा भाई पूणे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। जबकि निर्भया के पिता दिल्ली एयरपोर्ट पर कर्मचारी हैं। अब सुनील की गुरुग्राम में ट्रेनिंग चल रही है और जल्द ही वह प्लेन उड़ाने लगेगा।

गौरतलब है कि 29 दिसम्बर 2012 को 6 दरिंदों ने निर्भया कांड को अंजाम दिया था। इस वारदात के एक आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में मार्च 2013 में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले के चार आरोपियों मुकेश (29), पवन (22), विनय शर्मा (23) और अक्षय कुमार (31) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई थी। चारों आरोपी वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। जबकि
एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया था, जो 2015 में छूट गया।

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