उत्तरी कोरिया मुद्दे पर पुतिन और मैक्रॉन ने की एहम बातचीत;”बातचीत ही रास्ता”

September 15, 2017 by No Comments

क्रेमलिन, मास्को: नार्थ कोरिया के परमाणु परीक्षण और उसके ऊपर लगातार बयानबाज़ी के दौर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन ने फ़ोन पर बात की.

पुतिन और मैक्रॉन की बातचीत में तनाव की स्थिति को कैसे कम किया जाए इस पर चर्चा हुई. रूसी मुख्यालय क्रेमलिन ने इस बारे में कहा कि दोनों नेता इस बात को लेकर राज़ी हैं कि इस तनाव को और बढ़ने नहीं दिया जा सकता.

क्रेमलिन ने कहा है कि नार्थ कोरिया से बढ़ रहे पश्चिमी देशों के तनाव की समस्या को सुलझाने का तरीक़ा बातचीत है.

दोनों नेताओं ने नार्थ कोरिया द्वारा बलिस्टिक मिसाइल को दागने की निंदा की.गौरतलब है कि शुक्रवार के रोज़ नार्थ कोरिया ने एक मिसाइल दाग़ी जो जापान को पार कर गयी. रूस ने नार्थ कोरिया के लगातार परमाणु परीक्षण करने के मामले में कहा है कि इसको लेकर नार्थ कोरिया के ख़िलाफ़ UN में क़दम उठाया जा चुका है.

शुक्रवार के मिसाइल लांच के बाद US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट रेक्स टिलरसन ने इसकी निंदा की. उन्होंने इसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से चीन और रूस को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि उत्तरी कोरिया को सबसे अधिक तेल चीन भेजता है. टिलरसन ने कहा कि रूस में सबसे ज़्यादा उत्तरी कोरिया के बंधुवा मज़दूर काम करते हैं.

उन्होंने चीन और रूस से कहा कि वो इन लापरवाह मिसाइल लौन्चेस के बाद ख़ुद प्रत्यक्ष रूप से कार्यवाही करना चाहिए.

क्यूँ बढ़ रहा है तनाव

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से उत्तरी कोरिया के संयुक्त राज्य अमरीका और उसके मित्र देशों से ताल्लुक़ात ख़राब होते जा रहे हैं. इसको लेकर उत्तरी कोरिया के परमाणु परीक्षण माने जा रहे हैं जबकि उत्तरी कोरिया और उसके समर्थक देश ये मानते हैं कि उत्तरी कोरिया पर लगाए जा रहे प्रतिबन्ध ग़लत हैं. संयुक्त राज्य अमरीका और उसके साथी देश नार्थ कोरिया को उसका परमाणु कार्यक्रम रद्द करने के लिए कहते हैं जबकि उत्तरी कोरिया परमाणु शक्ति बनने की ओर है.

नार्थ कोरिया के ख़िलाफ़ हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में एक प्रस्ताव पारित हुआ था. इन नए प्रतिबंधों को चीन और रूस ने भी मान्यता दी थी जो आमतौर पर उत्तरी कोरिया के साथी देश माने जाते हैं. हालाँकि इस प्रस्ताव के पारित होने से पहले संशोधन किया गया था और प्रस्ताव की कठोर बातों को हटा लिया गया था.

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