जिसने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, ऐसे बम थे नोटबंदी और जीएसटी: राहुल गांधी

October 30, 2017 by No Comments

नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने देश की गिर रही अर्थव्यवस्था और नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर कटाक्ष किया है। राहुल का कहना है कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को दो झटके दिए हैं। पहला- नोटबंदी और दूसरा जीएसटी। नोटबंदी के विरोध में कांग्रेस 8 नवंबर को देश में काला दिवस मनाने जा रही है। देश के जीएसटी एक अच्छा आईडिया था। लेकिन मोदी सरकार ने एक अच्छे आईडिया को बेहद खराब ढंग से लागू किया है। इससे पूरे देश को नुकसान उठाना पड़ रहा है। नोटबंदी और जीएसटी बिल दोनों ही सरकार के टॉरपीडो (अंडरवॉटर मिसाइल) हैं। इन्होने भारत की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर दिया।
कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी ने एक बैठक को संबोधित किया। बैठक में राहुल ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के अलावा पार्टी के अन्य नेताओं के साथ पार्टी की आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जबकि गुजरात में दिसंबर में चुनाव हैं। नोटबंदी और जीएसटी को लेकर राहुल गांधी ने बीते काफी दिनों से मोदी सरकार पर जुबानी हमले कर रहे हैं।  इसके साथ सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर भी राहुल ने जीएसटी और नोटबंदी को लेकर ट्वीट किए थे।

कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष ने नोटबंदी के फैसले को एक साल पूरा होने पर देश भर में विरोध प्रर्दशन की योजना बनाई है। मगर सभी दल एक साथ इस प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। पीएम मोदी ने बीते साल 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया था, जिसके बाद 500 और 1000 के पुराने नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। कांग्रेस ने नोटबंदी को ‘‘सदी का सबसे बड़ा घोटाला’’ करार दिया था। विपक्ष का दावा है कि नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था और नौकरियों को नुकसान पहुंचा है।

मोदी सरकार ने नोटबंदी के वक्त दावा किया था कि इससे काला धन खत्म होगा, नकली नोट, भ्रष्टाचार और आतंकवाद पर लगाम लगेगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है। विपक्ष ने नोटबंदी के फैसले के कारण अर्थव्यवस्था की हालत बुरी होने, बेरोजगारी बढ़ने और जीडीपी कम होने की आशंका जताई थी। उनके मुताबिक, देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के कारण जीडीपी में 2 प्रतिशत कमी आने की बात कही थी, वह पूरी तरह सही साबित हुई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नोटबंदी के कारण 120 लोग मारे गये जबकि अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इनकी संख्या 300-400 है।

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