ओवैसी से टक्कर कौन लेगा; दिया बड़ा बयान-‘राहुल में दम है तो..’

October 22, 2018 by No Comments

आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असद उद्दीन ओवैसी यूँ तो हैदराबाद के सांसद हैं लेकिन उनके समर्थक पूरे देश में मिल जाते हैं. उन्हें यूँ तो मुसलमानों का नेता माना जाता है लेकिन उनके पास दलितों का भी अच्छा समर्थन है. ओवैसी के बारे में कहा जाता है कि उनकी लोकसभा सीट हैदराबाद से उन्हें हराना लगभग असंभव है.

इस बात को अच्छी तरह समझने वाले ओवैसी अपने विरोधियों से कहते हैं कि अगर दम है तो हैदराबाद से चुनाव लड़ कर दिखाओ. उनके विरोधी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि ओवैसी को उनके गढ़ में हराना नामुमकिन है. पिछले दिनों ख़बरें आयीं कि भाजपा हैदराबाद से कोई मज़बूत उम्मीदवार उतार सकती है लेकिन ओवैसी कहते हैं कि अगर अमित शाह और नरेंद्र मोदी भी यहाँ से चुनाव लड़ जाएँ तो उनकी हार ही होगी. वो कहते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी में भी दम हो तो हैदराबाद से चुनाव में उतरें.

इस समय तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार ज़ोरों पर है. इसी बीच बड़ी बड़ी पार्टियों के नेता तेलंगाना पहुँच रहे हैं. राहुल गाँधी ने भी तेलंगाना का दौरा किया है, इस दौरे पार वो हैदराबाद के पुराने शहर भी गए. पुराना शहर ओवैसी का मज़बूत गढ़ है.

राहुल के आगमन पर असद उद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया. उन्होंने ट्वीट में लिखा,”मूसी तहज़ीब के सिम्बल चार मीनार में आपका(राहुल गाँधी) स्वागत है, चूँकि आप और अमित शाह दोनों यहाँ आ रहे हो तो मैं आप लोगों को न्योता दूँगा कि यहाँ से चुनाव लड़ें और लोगों को पता चलने दें कि कौन उनकी तहज़ीब का बेहतर नुमाइंदा है.” इसके साथ ही उन्होंने एक कटाक्ष भी लिखा, उन्होंने लिखा कि जनेऊ या नो जनेऊ..सबका स्वागत है.

ओवैसी की इस बात पर कांग्रेस ने भी जल्द ही प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस एनसी बोस राजू ने कहा कि ओवैसी कौन होते हैं तय करने वाले कि कौन कहाँ से चुनाव लड़ें, राहुल जी एक राष्ट्रीय नेता हैं..वो जहाँ से चाहें वहाँ से चुनाव लड़ें. वो कहते हैं कि क्या ओवैसी राय बरेली से चुनाव लड़ेंगे.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी राष्ट्रीय नेता हैं और उनके भी अपने मज़बूत गढ़ हैं लेकिन हैदराबाद सीट पर ओवैसी को टक्कर देने वाला कोई नज़र नहीं आता है.असद उद्दीन ओवैसी को हराने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जी तोड़ कोशिश कर चुके हैं लेकिन उन्हें किसी तरह की कामयाबी हाथ नहीं आयी है. ओवैसी जानते हैं कि उन्हें कोई भी उनके गढ़ में चुनौती नहीं दे सकेगा और इत्तिफ़ाक़ से कोई बड़ा नेता उनकी सीट से लड़ जाता है और हार जाता है तो ये ओवैसी के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त होगी.

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