मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर ओवैसी को मिला शिवसेना का समर्थन, कही बड़ी बात

नई दिल्ली: दशकों से बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना के तल्‍ख रवैये में बदलाव के आसार न के बराबर है। मराठा आरक्षण की भड़की चिंगारी के बीच शिवसेना ने नया राग छेड़ दिया है। वैसे शिवसेना के वोट बैंक का बड़ा हिस्सा हिन्दू समुदाय से जुड़ा हुआ है. लेकिन अब शिवसेना मुस्लिम वोटर्स का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करना चाहती है. पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिक्षा में मुसलमानों को आरक्षण देने का समर्थन किया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने शिवसेना के रुख का समर्थन किया है। 

एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने कहा है कि हम सरकार के इस फैसले को चुनौती नहीं देंगे लेकिन हम नए तथ्यों के साथ कोर्ट जाएंगे और मुस्लिम आरक्षण के लिए मांग करेंगे। इससे पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग की थी। ओवैसी ने एक जगह लिखा है कि देश का मुसलमान भी आरक्षण का हकदार है, क्योंकि पीढ़ियों तक वे गरीबी में रहे हैं। ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, ‘रोजगार और शिक्षा में पिछड़े मुसलमानों को वंचित रखना अन्याय है। मैं लगातार कहता आया हूं कि मुस्लिम समुदाय में ऐसी पिछड़ी जातियां हैं जो पीढ़ियों से गरीबी में है। आरक्षण के जरिए इन्हें बाहर निकाला जा सकता है।

बता दें कि शिवसेना ने शिक्षा में मुसलमानों को 5% आरक्षण न देने को लेकर महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की कड़ी आलोचना की है। ओवैसी की पार्टी ने फड़णवीस सरकार पर बांबे हाई कोर्ट के फैसले को न मानने का भी आरोप लगाया है। उद्धव ठाकरे ने कहा था, ‘मराठा के अलावा धांगड़, मुस्लिम और अन्‍य समुदायों के आरक्षण की मांग पर भी गौर करना चाहिए। हमारी पार्टी इस मसले पर केंद्र सरकार का पूरा समर्थन करेगी।’. दरअसल महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को कैबिनेट की मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को इसे विधानसभा में पेश किया.

फडणवीस ने बड़ा दांव खेलते हुए पिछड़ा आयोग की सिफारिश के आधार पर 16 प्रतिशत मराठा आरक्षण का बिल पेश किया, जो ध्वनिमत से पास हो गया. बाद में विधान परिषद ने भी इस बिल पर अपनी मुहर लगा दी. जिससे यह मसला उछल पड़ा।बता दे कि सितंबर माह में भी महाराष्ट्र में मुस्लिम मूक मोर्चा की ओर से पुणे में एक मार्च निकाला गया है जिसमें मांग की गई कि शिक्षा, नौकरी में मुसलमानों को भी 5 फीसदी का आरक्षण दिया जाए. आरक्षण को लेकर अब हर समुदाय की ओर से मांग बढ़ती जा रही है. कह सकते हैं सरकारों द्वारा वोट बैंक बढ़ाने का यह आसान तरीका समय-समय पर सरकारों के लिए गले का फंदा भी बनता रहा है.

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