ओवैसी के डीएनए तक पहुंचे कांग्रेस नेता,बोले-ओवैसी तेरी हम…

July 9, 2021 by No Comments

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के डीएनए वाले बयान पर वरिष्ठ कांग्रेसी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अगर हिंदुओं और मुसलमानों का डीएनए एक ही है, तो धर्म परि वर्तन के खिलाफ कानून बनाने का क्या फायदा है।
असदउद्दीन ओवैसी (AIMIM अध्यक्ष), (क्रेडिट: फ़ाइल फ़ोटो)[/caption]

लव जेहाद के खिलाफ कानून बनाने की क्या जरूरत थी। इसका मतलब है कि मोहन भागवत और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का डीएनए भी एक ही है। श्री सिंह ने यह बयान मध्य प्रदेश के सीहोर में एक श्रद्धांजलि सभा के बाद पत्रकारों के सवाल पर दिया।
Owaisi- Digvijaya [/caption]

मंगलवार को भी दिग्विजय सिंह ने एक खबर की कटिंग को ट्वीट करके मोहन भागवत और असदुद्दीन ओवैसी को एक-दूसरे का मददगार बताया था। इससे पहले भी पांच जुलाई को दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि मोहन भागवतजी यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे। क्या यह शिक्षा आप मोदी-शाह व भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे।

उधर, दिग्विजय सिंह के बयान पर मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सर संघचालक मोहन भागवत की सोच राष्ट्र की एकता और अखंडता की है, तो वहीं दिग्विजय की सोच अलगाववादी वाली है। दिग्विजय के बयानों में सिर्फ और सिर्फ समाज के विभाजन की बातें और सांप्र दायिकता ही नजर आती है।
Digvijaya Singh [/caption]

गौरतलब है कि मोहन भागवत ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से हुए कार्यक्रम में कहा था कि देश में हिन्दू-मुस्लिम एकता भ्रा मक बात है, क्योंकि वे अलग-अलग नही, बल्कि एक ही हैं।

पूजा करने के तरीके के आधार पर लोगों में भेद नहीं किया जा सकता है। सभी भारतीयों का डीएनए एक ही है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। जो हिंदू यह कहता है कि यहां मुस्लिम नहीं रह सकते हैं, तो वह शख्स हिंदू है ही नहीं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भागवत के बयान को गलत ठहराया

पद्म विभूषण जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के डीएनए वाले बयान को गलत ठहराया है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का डीएनए वाला बयान अनुकूल नहीं है। मोहन भागवत दो दिन से चित्रकूट में हैं।

बुधवार को वह पद्म विभूषण जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज से शिष्टाचार भेंट करने के लिए तुलसी पीठ आश्रम गए थे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक के बाद रामभद्राचार्य ने भागवत के बयान को गलत ठहराया था।

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