बसपा प्रमुख लड़ सकती हैं लोकसभा चुनाव, ओवैसी से मिलेगा समर्थन?

November 14, 2018 by No Comments

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में शिकस्त देने की तैयारी में विपक्ष की योजना को बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भी धार देने में लगी हैं। मायावती करीब 15 वर्ष के बाद लोकसभा के चुनावी मैदान में उतरने के मूड में हैं।

मायावती इस चुनाव में उतर कर यह संदेश देना चाहती हैं कि उनमें नेतृत्व करने की क्षमता है और सब उनके साथ हैं। सपा से गठजोड़ और अन्य विपक्षी दलों की सहमति से ही उन्होंने चुनाव लड़ने का मन बनाया है। अखिलेश के साथ गठबंधन में मायावती खुद किस सीट से चुनाव लड़ेंगी, यह उनको तय करना है। इससे पहले 2004 में मायावती अकबरपुर सीट से लोकसभा चुनाव जीती थीं। बसपा का यह पुराना गढ़ है लेकिन यह सीट समान्य हो गई। इसी कारण वह अपने गृह जिले गौतम बुद्ध नगर से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। 

इसके अलावा बिजनौर सीट पर भी चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। दरअसल, पश्चिमी यूपी में भी बसपा मजबूत रही है। यही वजह है कि कैराना और नूरपुर में उपचुनाव न लड़ने के बावजूद मायावती की नजर यहां के वोटों के रुझान पर थी। उन्होंने पहले गोरखपुर और फूलपुर में सपा को खुला समर्थन दिया। वहीं, नूरपुर और कैराना में खुला समर्थन न करके यह भांपने की कोशिश की कि दलित वोट किधर ट्रांसफर होता है। बीजेपी की हार से यह साफ हो गया कि दलित वोट काफी हद तक सपा को ट्रांसफर हुआ।

यदि वह सपा को जा सकता है तो भविष्य में बसपा के लिए दलित वोट अपने साथ लेना और आसान हेागा। यही वजह है कि बिजनौर से लोकसभा चुनाव लड़ने का विकल्प भी तलाश जा रहा है। डेढ़ दशक बाद मायावती का एक बार फिर से ताल ठोंकने की तैयारी है। अगर गठबंधन के तहत मायावती चुनाव लड़ती है तो निश्चित तौर पर बसपा को जमीनी स्तर पर काफी फायदा होगा। इसके अलावा गठबंधन के तहत अखिलेश यादव भी मायावती के लिए प्रचार करते नजर सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन जैसी पार्टियाँ मायावती को समर्थन दे सकती हैं. हालाँकि मायावती पहले ही महागठबंधन में हैं लेकिन बाहर से कई और पार्टियाँ उन्हें समर्थन दे सकती हैं. इसके अतिरिक्त भीम आर्मी भी उनका पूरा समर्थन करेगी, ऐसा अनुमान है.

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