ओवैसी ने दिया ऐसा बयान कि साधू संत भी कर रहे हैं ‘वाह-वाह’

November 1, 2018 by No Comments

लंबे समय से प्रतीक्षित देश के सबसे बड़े मुकदमे के रूप में जाने जाने वाले अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद केस की सुनवाई एक बार फिर से टल गई है। देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या विवाद पर सुनवाई हुई।सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई मात्र 3 मिनट में ही टल गई। भारतीय जनता पार्टी पर जनता का विश्वास था कि लोकसभा 2014 की जीत के बाद राम मंदिर का निर्माण होना तय है लेकिन 5 साल पूरे होने वाले ही हैं अभी तक कोई असर नहीं दिखा है।

बाबरी मस्जिद के पैरोकार इक़बाल अंसारी ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऐतबार है और वे फैसले का इंतजार करंगे और यही नहीं कहा कि दोनों पक्षों को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के खिलाफ ऐसा बयान दिया है कि मंदिर निर्माण ना होने के कारण नाराज हिंदू भी इस बयान का समर्थन कर रहे हैं। दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मंदिर पर अध्यादेश क्यों नहीं लाती। हमेशा धमकी देते हैं कि हम अध्यादेश लाएंगे। बीजेपी, आरएसएस, वीएचपी के सभी टॉम, डिक और हैरी यही कहते हैं।

ओवैसी ने कहा,”हम कहते हैं इसे लाओ, आप पावर में हो। मैं आपको अध्यादेश लाने की चुनौती देता हूं। हमलोग देखेंगे।” साथ ही उन्होंने कहा कि 56 इंच का सीना है तो अध्यादेश लाकर दिखाएं। ओवैसी की इस बयान से तमाम साधु संत भी सहमति दी करते दिखाई दे रहे हैं और मोदी सरकार से जवाब मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई टालने पर भाजपा के नेता में भी कुछ ना कुछ नाराजगी देखने को मिली। बीजेपी नेता विनय कटियार ने कहा, ‘सुनवाई कांग्रेस के दबाव में टाला जा रहा है।

कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के जो वकील हैं, वो नहीं चाहते कि 2019 से पहले इनकी सुनवाई हो, वो इसे टालना चाहते हैं।’ अयोध्या के साधु संत भी काफी ज्यादा भाजपा का नाराज है और उन्होंने धमकी दी है कि लोकसभा 2019 के चुनाव में भाजपा को इसका जवाब देंगे। वहीं एक साधु ने तो मोदी सरकार को चुनौती भी दे दी है। और कहा कि अगर मोदी सरकार अगले कुछ समय में कहने का मतलब यह है कि, लोकसभा 2019 के चुनाव के पहले राम मंदिर निर्माण में उचित कदम नहीं उठाए तो वह चुनाव के पहले आत्मदाह कर देंगे और इसका भुगतान भाजपा को अवश्य करना पड़ेगा।

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