पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित समाज लड़कियों को ही दोष देता है: पूजा शुक्ला

Women’s Achiever  सीरीज़:  सामाजिक कार्यकर्ता और समाजवादी पार्टी की युवा नेत्री पूजा शुक्ला पिछले दिनों काफ़ी चर्चा में रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से नाराज़ पूजा ने अपने कई साथियों के साथ मुख्यमंत्री को काले झंडे भी दिखाए थे जिसके बाद उन्हें लगभग एक महीना जेल में रहना पड़ा था. पूजा ने जेल से एक ख़त भी लिखा था जिसके ज़रिये उन्होंने संघर्ष को बनाए रखने की बात कही थी. बतौर नेत्री हमने उनसे इस विषय पर बात की कि एक महिला के लिए राजनीति में आना कितना मुश्किल है. इसके अलावा दूसरी महिलाओं को वो क्या सन्देश देंगी इस पर भी हमने उनसे बात की.

कितना मुश्किल है एक लड़की के लिए राजनीति में आना?
पूजा: सच में बहुत मुश्किल है, हमें पढ़ने के लिए बहुत संघर्ष करना होता है तो राजनीति में आना तो फिर बहुत मुश्किल ही होता है.. मैं शुरू से ही सामाजिक रूप से काम करती थी और कुछ वक़्त में मुझे ये लगने लगा कि बिना राजनीतिक हुए सामाजिक काम नहीं किये जा सकते.

किस क़िस्म की परेशानियाँ आती हैं? घरवाले सपोर्ट करते हैं?
पूजा: घरवालों ने मुझे सपोर्ट नहीं किया और मुझे लगता है कि जिस दिन लड़कियाँ अपनी सुनने लग जायेंगी और फ़ाइनेंशियाली independent हो जायेंगी उस दिन लड़कियों के लिए चीज़ें आसान होंगी.घर में या बाहर दोनों जगह पितृसत्तात्मक ढांचा है और जैसे घर में महिलाओं को दबाया जाता है वैसे ही बाहर भी दबा कर रखने की कोशिश होती है.

आगे क्या प्लान है आपका?
पूजा: आगे भी राजनीति ही करूँगी मैं..

क्या समाजवादी पार्टी में महिलाओं को वो सम्मान मिल पा रहा है जिसकी वो हक़दार हैं?
पूजा: राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ने महिला सशक्तिकरण पर काम किया है. संघर्षशील महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, उन्हें चुनाव में भागीदारी दी जा रही है. वर्तमान में सपा महिला सशक्तिकरण पर लगातार काम कर रही है, उसके लिए चाहे अखिलेश सरकार की कुछ योजनायें देख लें.. जैसे समाजवादी पेंशन योजना है या फिर शीरोज़ हैंगआउट को ही देख लें.

अक्सर ये देखा गया है कि किसी लड़की के साथ किसी क़िस्म की बदतमीज़ी हो जाती है लेकिन उसके बाद बजाय उसको सांत्वना देने उसी को दोषी क़रार दे दिया जाता है.इस पर क्या कहेंगी आप?
पूजा: हम ये कह रहे हैं कि समाज पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित है तो गिल्ट भी वो महिलाओं को ही देता है, इसी मानसिकता को तोड़ने की ज़रुरत है. अपनी इसी मानसिकता की वजह से  समाज कभी लड़कियों के कपड़ों पर कमेंट करेगा कभी कुछ और..

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